भारत में पिछले एक हफ्ते से चल रहे इंडिगो संकट को लेकर केंद्र सरकार ने मंगलवार (9 दिसंबर 2025) को बड़ा कदम उठाया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) में आयोजित विशेष बैठक में केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू, मंत्रालय के सचिव समीर सिन्हा, और इंडिगो के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक में इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स को बुलाकर संकट की संपूर्ण स्थिति पर जानकारी ली गई।
बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि क्रू रोस्टर की गड़बड़ियां, फ्लाइट शेड्यूल में अव्यवस्था और यात्रियों को समय पर सही जानकारी न देना—इंडिगो संकट के मुख्य कारण रहे। इसी दौरान एक दृश्य ऐसा भी सामने आया जब CEO पीटर एल्बर्स मंत्री के सामने हाथ जोड़कर स्थिति सुधारने का आश्वासन देते नजर आए, जो कंपनी की गंभीरता को दर्शाता है।
किराया नियंत्रण और यात्रियों की सुविधा पर सख्त निर्देश
सरकार ने बैठक के दौरान इंडिगो को साफ आदेश दिया कि किराया नियंत्रण, रिफंड नियम, और यात्रियों की सुविधा से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का पालन बिना किसी अपवाद के किया जाए।
यात्रियों की लगातार बढ़ती शिकायतों को देखते हुए मंत्रालय ने इंडिगो को अपने पूरे ऑपरेशन सिस्टम को मजबूत करने का निर्देश दिया। साथ ही इंडिगो को अपने रूट नेटवर्क में 10% कटौती करने का आदेश भी दिया गया है, हालांकि कंपनी अपने सभी डेस्टिनेशन को पहले की तरह कवर करती रहेगी।
DGCA की अलग बैठक में भी CEO को पेश होना होगा
मंत्रालय ने साफ किया कि यह केवल शुरुआती कार्रवाई है। इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स को एक दिन बाद, यानी बुधवार (10 दिसंबर 2025) को DGCA की विशेष बैठक में भी उपस्थित होना होगा।
इस बैठक में ऑपरेशनल मानकों, सुरक्षा नियमों और भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए लागू किए जाने वाले उपायों पर विस्तार से चर्चा होगी। सरकार इस बात को लेकर सतर्क है कि यात्रियों की असुविधा दोबारा न हो, इसलिए निगरानी और सख्ती दोनों जारी रहेंगी।
इंडिगो का दावा—अब उड़ानें पूरी तरह सामान्य
बैठक से पहले इंडिगो ने बयान जारी किया कि कंपनी ने एक हफ्ते से अधिक चल रहे ऑपरेशनल संकट को अब काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है।
कंपनी के अनुसार, उसका ऑन-टाइम परफॉर्मेंस सामान्य स्तर पर लौट चुका है, और बुधवार (10 दिसंबर 2025) को लगभग 1,900 उड़ानें संचालित करने की योजना है।
इंडिगो ने कहा कि वह अपने यात्रियों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। हालांकि मंत्रालय के सख्त रुख के बाद अब कंपनी पर सुधारात्मक कार्रवाई को तेजी से लागू करने का दबाव बढ़ गया है।
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