पश्चिमी एशिया के समुद्री रास्तों पर अचानक बढ़े तनाव ने भारत सरकार की चिंता और गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। ओमान तट के करीब एक कमर्शियल जहाज पर हुए घातक हमले के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। भारत ने इस घटना को लेकर अपनी गहरी नाराजगी जताते हुए नई दिल्ली में तैनात अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स (उप-मिशन प्रमुख) जेसन मीक्स को तुरंत तलब किया और उन्हें एक सख्त विरोध पत्र (Demarche) सौंप दिया। भारत के इस अप्रत्याशित और कड़े कदम के बाद वाशिंगटन में भी हड़कंप मच गया है। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) को तुरंत इस मामले पर सामने आना पड़ा। अमेरिकी प्रवक्ता ने इस पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए कहा है कि अमेरिका इस गंभीर मसले को लेकर भारत सरकार के साथ लगातार और सीधे संपर्क में बना हुआ है। इस कूटनीतिक हलचल ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
लापता नाविकों की तलाश और समुद्र में खौफ का मंजर
दरअसल, यह पूरा विवाद ओमान तट के पास वाणिज्यिक पोत ‘सेटेबेलो’ (Settebello) पर हुए एक भीषण हमले के बाद शुरू हुआ। इस जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। भारतीय नौसेना और स्थानीय एजेंसियों की मुस्तैदी के कारण 21 भारतीय नाविकों को तो सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन दुर्भाग्य से 3 भारतीय नाविक अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष कमर्शियल जहाजों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत ने साफ किया है कि समुद्र में लगातार हो रहे ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन हैं और वैश्विक व्यापार के सुरक्षित मार्गों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं।
होर्मुज स्ट्रेट के पास दूसरी घटना और भारत का कूटनीतिक रुख
चिंता की बात यह है कि यह इस हफ्ते की इकलौती घटना नहीं है। इससे ठीक पहले, सोमवार को पालाऊ के झंडे वाले एक और तेल टैंकर ‘एमटी मैरिवेक्स’ (MT Marivex) में होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में अचानक आग लग गई थी। इस जहाज पर भी सभी 24 चालक दल के सदस्य भारतीय ही थे, जिन्हें ओमान सरकार के सहयोग से सुरक्षित निकाल लिया गया था। इन बैक-टू-बैक घटनाओं ने भारत को कूटनीतिक मोर्चे पर आक्रामक होने के लिए मजबूर कर दिया है। भारत ने वैश्विक महाशक्तियों को संदेश दिया है कि क्षेत्र में जारी 100 दिनों से अधिक पुराना संघर्ष अब एक मानवीय संकट से आगे बढ़कर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए नासूर बनता जा रहा है, जिसे रोकने में वैश्विक रणनीतियां नाकाम साबित हो रही हैं।
तनाव कम करने की अपील और आगे की राह
भारत सरकार ने अब दुनिया के सभी देशों और संघर्ष में शामिल पक्षों से तुरंत तनाव कम करने (De-escalation) की पुरजोर अपील की है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में जोर देकर कहा है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही इस संकट का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है, ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बिना किसी रुकावट के जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करना पूरी दुनिया के हित में है। फिलहाल, भारत अपने लापता तीन नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए ओमान के अधिकारियों और अमेरिकी खुफिया तंत्र के साथ मिलकर हर संभव कोशिश कर रहा है, जबकि पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि भारत के इस कड़े रुख के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देश मध्य-पूर्व के इन समुद्री लुटेरों और हमलावरों से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
