अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर एक अहम बिल पारित हुआ है। इस प्रस्ताव को 262 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि 159 ने इसके खिलाफ मतदान किया। बिल में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ बड़े देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने का प्रावधान रखा गया है। इसी वजह से भारत और चीन पर भी संभावित आर्थिक असर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति को तय परिस्थितियों में ऐसा शुल्क लगाने का अधिकार देने की बात करता है।
छह भारतीय-अमेरिकी सांसदों में अलग रहा राजा कृष्णमूर्ति का रुख
इस वोटिंग में भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों का रुख भी खास चर्चा में रहा। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मौजूद छह भारतीय-अमेरिकी सांसदों में से राजा कृष्णमूर्ति ने बिल के पक्ष में वोट किया। वहीं रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, अमी बेरा, श्री थानेदार और सुहास सुब्रमण्यम ने प्रस्ताव का विरोध किया। कृष्णमूर्ति भी डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं, लेकिन इस मुद्दे पर उनका वोट पार्टी के उन सदस्यों से अलग रहा जिन्होंने बिल का विरोध किया। रिपोर्टों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी के 58 अन्य सांसदों ने भी इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया। इससे साफ है कि रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर दोनों प्रमुख अमेरिकी दलों के कुछ सदस्यों के बीच अलग-अलग रुख देखने को मिला।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पूरा मामला?
बिल में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता है और रूस भी उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। ऐसे में अगर भविष्य में अमेरिकी प्रशासन इस प्रावधान का इस्तेमाल करता है, तो भारतीय व्यापार और ऊर्जा आयात पर असर पड़ने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। चीन भी इस प्रावधान के दायरे में आ सकता है। दूसरी तरफ, प्रस्ताव में रूस से अमेरिका आने वाले यूरेनियम को लेकर अलग व्यवस्था का जिक्र है। इसमें रूस की परमाणु कंपनी रोसाटॉम और उससे जुड़ी कंपनियों से आने वाले यूरेनियम पर मौजूदा अमेरिकी कानूनों के तहत नियम लागू करने की बात कही गई है।
यूक्रेन के समर्थन में भी सामने आया कृष्णमूर्ति का बयान
राजा कृष्णमूर्ति का रूस प्रतिबंधों से जुड़ा रुख यूक्रेन के मुद्दे पर उनके सार्वजनिक बयानों से भी जुड़ा हुआ है। वोटिंग से पहले उन्होंने यूक्रेन समर्थक एक समूह के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन की स्वतंत्रता और संप्रभुता के समर्थन में अमेरिका की भूमिका की बात कही। कृष्णमूर्ति इलिनॉयस से सांसद हैं और जनवरी 2027 में प्रतिनिधि सभा से अलग होने वाले हैं। रूस पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी कोशिशों के बीच यह बिल अब आगे की प्रक्रिया से गुजरेगा। इसलिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि संभावित टैरिफ का अंतिम स्वरूप क्या होगा और अमेरिकी प्रशासन भविष्य में इसके तहत भारत जैसे देशों के खिलाफ क्या कदम उठाता है।
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