बिहार के नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। 5 दिसंबर 2025 की शाम कपड़ों की फेरी कर घर लौट रहे मोहम्मद अतहर हुसैन (40) पर अचानक कुछ लोगों ने हमला कर दिया। यह हमला भट्टा गांव के पास किया गया, जहां 5 से 7 लोगों ने उन्हें घेर लिया। शुरुआत में गाली-गलौज हुई और फिर देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पीड़ित ने खुद को निर्दोष बताते हुए बार-बार जान की भीख मांगी, लेकिन हमलावरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। घटना के वक्त आसपास लोग मौजूद थे, लेकिन डर के कारण कोई भी बीच-बचाव करने नहीं आया।
हैवानियत की हद – रॉड, पेट्रोल और अमानवीय यातनाएं
परिजनों के अनुसार, हमलावरों ने अतहर हुसैन के साथ बेहद क्रूर व्यवहार किया। पहले उनके कपड़े उतरवाए गए, फिर उन्हें जमीन पर गिराकर छाती और पेट पर चढ़कर कूदते रहे। लोहे की गर्म रॉड से उनके शरीर के कई हिस्सों को दागा गया। हाथ और उंगलियां तोड़ दी गईं, पैर इस कदर कुचले गए कि वे हिल भी नहीं पा रहे थे। आरोप है कि हमलावरों ने उनके शरीर पर पेट्रोल भी छिड़का और आग लगाने की धमकी दी। यह पूरी घटना करीब आधे घंटे तक चली, जिसमें पीड़ित लगातार दर्द से कराहता रहा। यह हमला सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि एक सोची-समझी क्रूरता का उदाहरण था, जिसने इंसानियत की सारी सीमाएं तोड़ दीं।
जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष
गंभीर हालत में स्थानीय लोगों की मदद से मोहम्मद अतहर हुसैन को पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक देखते हुए उन्हें बिहार शरीफ सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर पर कई गहरे जख्म थे, हड्डियां टूट चुकी थीं और अंदरूनी चोटें भी गंभीर थीं। कई दिनों तक वह जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। परिवार लगातार इलाज में जुटा रहा, लेकिन शुक्रवार देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक के पीछे पत्नी, बच्चे और बूढ़े माता-पिता हैं, जिनका अब कोई सहारा नहीं बचा।
सवालों के घेरे में कानून व्यवस्था
इस घटना के बाद पूरे इलाके में गुस्सा और डर का माहौल है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अगर समय पर सख्त कार्रवाई होती और आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की जाती, तो शायद अतहर हुसैन की जान बच सकती थी। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों की पहचान कर ली गई है। जल्द ही गिरफ्तारी का भरोसा दिया गया है। हालांकि, यह घटना एक बार फिर भीड़ हिंसा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर कब तक निर्दोष लोग अफवाहों और शक के आधार पर भीड़ की हैवानियत का शिकार होते रहेंगे? अतहर हुसैन की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के संवेदनशीलता के खत्म होते जाने की गवाही है।
