विपक्षी नेताओं और चुनाव आयोग के बीच चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग कर रहे थे। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि आयोग उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है। इसी बीच चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसे किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों से मिलने में कोई परेशानी नहीं है। आयोग के मुताबिक, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल पहले भी तय प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग से मुलाकात करते रहे हैं और आगे भी इसी प्रक्रिया के अनुसार बैठक की जा सकती है। आयोग ने यह भी साफ किया कि वह राजनीतिक दलों की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।
आयोग का दावा- अब तक किसी पार्टी ने नहीं मांगा मिलने का समय
चुनाव आयोग की ओर से जारी सफाई में कहा गया है कि अभी तक किसी भी राजनीतिक दल की तरफ से आधिकारिक तौर पर मुलाकात के लिए समय नहीं मांगा गया है। यही वजह है कि आयोग की ओर से किसी बैठक का समय तय नहीं किया गया। आयोग का कहना है कि यदि कोई राजनीतिक दल निर्धारित प्रक्रिया के तहत मिलने का अनुरोध करता है तो उसके प्रतिनिधियों से बातचीत की जा सकती है। इस बयान के बाद विपक्ष के उस आरोप पर सवाल खड़े हो गए हैं जिसमें कहा जा रहा था कि चुनाव आयोग नेताओं से मिलने से बच रहा है। आयोग ने अपने रुख में यह संकेत दिया है कि दरवाजे बातचीत के लिए खुले हैं, लेकिन बैठक के लिए औपचारिक प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा। ऐसे में अब राजनीतिक दलों की ओर से अगला कदम क्या उठाया जाता है, इस पर सबकी नजर है।
राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेता धरने पर क्यों बैठे थे?
दरअसल, मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्षी नेताओं का कहना था कि वे चुनाव आयोग के सामने अपनी शिकायतें और सवाल रखना चाहते हैं। इसी मांग को लेकर नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए। विपक्ष का आरोप था कि चुनाव आयोग उनकी बात सुनने और प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने को तैयार नहीं है। नेताओं ने यह भी कहा कि जब तक आयोग की ओर से बातचीत के लिए बुलावा नहीं आता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता लगातार आयोग से मुलाकात की मांग करते रहे। प्रदर्शन की वजह से दिल्ली में राजनीतिक माहौल भी गरमा गया और मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
शाम होते-होते पुलिस ने हिरासत में लिया, अब आयोग के बयान से बदला मामला
मंगलवार शाम प्रदर्शन कर रहे विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस ने नेताओं को बस में बैठाकर आकाशवाणी भवन परिसर से हटा दिया। इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से आया बयान इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ विपक्ष मुलाकात का रास्ता बंद होने का आरोप लगा रहा था, वहीं आयोग ने कहा है कि उसे किसी भी राजनीतिक दल के सदस्यों से बातचीत करने में कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक के लिए तय प्रक्रिया के तहत समय मांगना जरूरी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विपक्षी दल औपचारिक रूप से मुलाकात का अनुरोध करते हैं और क्या इसके बाद आयोग के साथ बैठक होती है। फिलहाल प्रदर्शन, हिरासत और चुनाव आयोग की सफाई के बाद यह राजनीतिक विवाद और तेज होता दिखाई दे रहा है।
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