समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के लिए रामपुर जेल से बाहर आना किसी राहत की तरह नहीं, बल्कि एक नए कानूनी संकट की शुरुआत साबित हुआ। जैसे ही आज़म खान जेल के मुख्य द्वार से बाहर कदम रखने वाले थे, केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने पैरामिलिट्री फोर्स के भारी सुरक्षा घेरे के बीच उन्हें फिर से अपनी हिरासत में ले लिया। जेल के बाहर ईडी की करीब तीन गाड़ियां पहले से ही तैनात थीं। इस नाटकीय घटनाक्रम ने एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है कि आज़म खान की मुश्किलें कम होने का नाम क्यों नहीं ले रही हैं।
“कानून खत्म हो चुका है, क्या मुसलमान होना ही गुनाह है?”
गिरफ्तारी से ठीक पहले जब मीडिया ने आज़म खान से प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो उनका दर्द और खीझ साफ झलक रही थी। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बेहद भावुक और तीखे लहजे में कहा कि अब उनके पास कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में जैसे कानून अब लगभग खत्म सा हो गया है। आज़म खान ने तल्ख अंदाज में पूछा कि क्या सिर्फ एक मुसलमान होने की उन्हें यह सजा भुगतनी पड़ रही है? उनके इन बयानों ने इस पूरी कार्रवाई को एक नया राजनीतिक और सामाजिक रंग दे दिया है, जिस पर अब तीखी बहस शुरू हो गई है।
यूनिवर्सिटी और स्कूल बनाना ही हमारा सबसे बड़ा गुनाह था
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आज़म खान ने अपने ऊपर लग रहे तमाम आरोपों और कानूनी शिकंजे के पीछे की वजहों पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका और उनके परिवार का एकमात्र गुनाह यह था कि उन्होंने गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए एक बड़ी यूनिवर्सिटी और स्कूल खड़े किए। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि अगर बच्चों के लिए तालीम के मंदिर यानी स्कूल बनवाना जुर्म है, तो फिर उनका कसूर वाकई बहुत बड़ा है। हालांकि, ईडी ने यह कार्रवाई किस विशेष मामले या वित्तीय अनियमितता के सिलसिले में की है, इस पर एजेंसी की तरफ से आधिकारिक रूप से और विवरण सामने आना अभी बाकी है।
राजनीतिक हलचल तेज और आगे की कानूनी लड़ाई
रामपुर जेल के बाहर हुई इस अचानक कार्रवाई के बाद से उत्तर प्रदेश की सियासत में पारा एक बार फिर चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के समर्थकों और नेताओं में इस गिरफ्तारी को लेकर भारी नाराजगी और चिंता देखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि इस नए कानूनी शिकंजे के बाद आज़म खान की मुश्किलें और लंबी खिंच सकती हैं। एक तरफ जहां उनके वकील इस मामले में कानूनी राहत पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है।
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