उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की राजनीति में इन दिनोंवान बड़ा भूचाल आया हुआ है, जिसने सूबे के सियासी गलियारों का पारा पूरी तरह बढ़ा दिया है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बेहद करीबी और इलाके के जाने-माने ब्राह्मण चेहरे माने जाने वाले जिला पंचायत सदस्य भवानी भीख शुक्ला ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का साथ छोड़ दिया है। खास बात यह है कि भवानी भीख शुक्ला ने अपने चारों भाइयों—श्री भगवान शुक्ला, कृष्ण भगवान शुक्ला, शिव भगवान शुक्ला, विष्णु भगवान शुक्ला और शंकर भगवान शुक्ला—तथा पूरे परिवार के साथ समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया है। राजधानी लखनऊ स्थित सपा पार्टी मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में इस परिवार ने साइकिल की सवारी कर ली, जिससे पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।
अपनों के ही जुल्म और बीजेपी की बेरुखी से टूटा सब्र का बांध
बीजेपी को अलविदा कहने के पीछे शुक्ला परिवार का दर्द खुलकर सामने आया है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे लंबे समय से पार्टी की रीढ़ बनकर काम कर रहे थे और बृजभूषण शरण सिंह के खास सिपहसलारों में गिने जाते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर उन्हें सिर्फ उपेक्षा ही मिली। परिवार ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए बताया कि करीब एक साल पहले उन पर जानलेवा हमला हुआ था जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं और वे अस्पताल में भर्ती रहे। आरोप है कि सत्ता पक्ष के एक विधायक के इशारे पर हुए इस हमले के बावजूद पुलिस और पार्टी संगठन ने आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और न ही मुकदमा दर्ज हुआ। न्याय न मिलने और लगातार हो रही अनदेखी से तंग आकर आखिरकार इस परिवार ने भगवा खेमा छोड़कर समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ने का कड़ा फैसला लिया।
बृजभूषण सिंह से व्यक्तिगत सम्मान बरकरार, राजनीतिक रास्ते हुए जुदा
भले ही भवानी भीख शुक्ला और उनके भाइयों ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली है, लेकिन पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रति उनका पुराना निजी सम्मान अभी भी कायम है। परिवार ने साफ किया है कि सपा में जाने से पहले उन्होंने बृजभूषण सिंह से कोई राजनीतिक सलाह या चर्चा नहीं की थी, क्योंकि यह उनके आत्मसम्मान की लड़ाई थी। वे आज भी बृजभूषण सिंह को अपना संरक्षक और मार्गदर्शक मानते हैं, लेकिन स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते उन्हें पार्टी बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही इस कदम से बृजभूषण सिंह और बीजेपी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन शुक्ला परिवार ने साफ कर दिया है कि उनका यह रुख केवल स्थानीय व्यवस्था और न्याय न मिलने के विरोध में है।
गोंडा की सियासत और आगामी चुनावों पर कितना पड़ेगा असर?
गोंडा जिले की सात विधानसभा सीटों के सियासी गणित पर नजर डालें तो इस परिवार का समाजवादी पार्टी में आना विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दांव माना जा रहा है। गोंडा के इलाके में शुक्ला परिवार और भगवान स्वरूपों वाले इन पांचों भाइयों की अपनी एक सामाजिक पकड़ और मजबूत पैठ है। अखिलेश यादव ने भी खुद सभी भाइयों का नाम लेकर पार्टी में गर्मजोशी से स्वागत किया है, जो इस बात का संकेत है कि सपा इसे बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में भुनाने की तैयारी में है। हालांकि, जमीन पर इस सियासी फेरबदल का कितना असर होगा और यह आने वाले चुनावों में वोट बैंक में कितना तब्दील हो पाएगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस बगावत ने गोंडा की सियासत में हलचल जरूर मचा दी है।
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