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‘BAP है BJP की B टीम..’ कांग्रेस विधायक ने भारतीय आदिवासी पार्टी पर कसा तंज, लगाए ये आरोप

 कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा ने BAP को बीजेपी की B-टीम बताया और राजस्थान सरकार पर मनरेगा, शिक्षा व किसानों के मुद्दों को लेकर सवाल उठाए। जानें पूरा मामला।

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राजस्थान के डूंगरपुर में कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा के बयान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। डूंगरपुर विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष घोघरा ने भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) पर निशाना साधते हुए उसे बीजेपी की ‘बी-टीम’ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि BAP की राजनीतिक गतिविधियों से कांग्रेस को नुकसान और बीजेपी को फायदा पहुंच रहा है। घोघरा ने आदिवासी समाज के नाम पर होने वाली राजनीति, नेताओं की चुनावी रणनीति और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केवल ऊंट पर बैठकर या पारंपरिक प्रतीकों का प्रदर्शन करके विकास नहीं किया जा सकता। जनता को रोजगार, बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं चाहिए। हालांकि, बीजेपी और BAP को लेकर लगाए गए ये आरोप कांग्रेस विधायक के राजनीतिक दावे हैं। संबंधित दलों का पक्ष सामने आने के बाद ही इस विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

 BAP की चुनावी रणनीति पर सवाल

गणेश घोघरा ने BAP की संगठनात्मक व्यवस्था और चुनाव लड़ने के फैसलों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यदि पार्टी की ‘जाजम व्यवस्था’ में सभी कार्यकर्ताओं को बराबर अवसर देने की बात कही जाती है, तो फिर चुनावों में दूसरे कार्यकर्ताओं को मौका क्यों नहीं मिलता? उन्होंने सांसद, विधायक और जिला परिषद चुनावों में नेताओं की भूमिका का जिक्र करते हुए संगठन के भीतर अवसरों के बंटवारे पर सवाल उठाए। घोघरा ने यह भी आरोप लगाया कि BAP के कुछ राजनीतिक फैसलों से कांग्रेस को चुनावी नुकसान हुआ है। नगर परिषद चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि BAP के पार्षद मतदान के लिए नहीं पहुंचे थे। इसके साथ ही उन्होंने आदिवासी संस्कृति के प्रतीकों और नेताओं की जीवनशैली पर तंज कसते हुए कहा कि ऊंट पर बैठने का दिखावा करने के बजाय क्षेत्र में ठोस विकास कार्य होने चाहिए। उनके इस बयान से डूंगरपुर की राजनीति में कांग्रेस और BAP के बीच जुबानी टकराव बढ़ने के आसार हैं।

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मनरेगा, स्कूल और किसानों के मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा

BAP पर आरोप लगाने के साथ ही कांग्रेस विधायक ने राजस्थान की बीजेपी सरकार को भी निशाने पर लिया। घोघरा ने ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत रोजगार की उपलब्धता और मजदूरी भुगतान में कथित देरी का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से ग्रामीण परिवारों को आजीविका के लिए दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ता है। उन्होंने आदिवासी बहुल इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ जगहों पर जर्जर भवनों और जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। किसानों के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार से सवाल किए। घोघरा के मुताबिक, बैलों से खेती करने वाले किसानों को सहायता देने के दावों के बावजूद जरूरतमंदों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से रोजगार, शिक्षा और कृषि सहायता से जुड़े वादों पर जवाब मांगा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित विभागों के आंकड़ों और सरकारी पक्ष की जानकारी जरूरी है।

डिग्री पर सवाल उठाने वालों को जवाब

अपने शैक्षणिक ज्ञान पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए घोघरा ने कहा कि उन्होंने एमए और एम.फिल की पढ़ाई की है तथा उनकी डिग्रियां संबंधित संस्थानों ने जारी की हैं। उन्होंने सवाल किया कि दूसरे लोगों को किसी के ज्ञान का प्रमाणपत्र देने का अधिकार किसने दिया है। कांग्रेस विधायक ने राजनीतिक बहस में व्यक्तिगत टिप्पणियों के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की बात भी कही। उनके बयान में एक ओर BAP की चुनावी रणनीति और बीजेपी से उसके कथित संबंधों पर आरोप लगाए गए, तो दूसरी ओर राज्य सरकार से ग्रामीण विकास के सवाल पूछे गए। डूंगरपुर और आसपास के आदिवासी बहुल इलाकों में कांग्रेस, बीजेपी और BAP के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच यह बयान अहम माना जा रहा है। अब निगाहें BAP और बीजेपी की प्रतिक्रिया पर हैं। उनके जवाब के बाद ही साफ होगा कि वे घोघरा के आरोपों और मनरेगा, शिक्षा तथा किसानों से जुड़े सवालों पर क्या पक्ष रखते हैं। फिलहाल, इस बयान ने स्थानीय राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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