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ऑफिस से घर लौटना भी बना जोखिम, पुणे में तेंदुए की हलचल के बाद IT कर्मचारियों के लिए नई एडवाइजरी

पुणे के आईटी हब में तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों से कर्मचारियों में डर का माहौल है. Cognizant ने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए रात के नियम बदले हैं और सख्त एडवाइजरी जारी की है. जानिए पूरे दिशा-निर्देश और इसकी वजह.

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महाराष्ट्र का आईटी हब कहलाने वाला पुणे इन दिनों एक अनोखी और चिंताजनक वजह से चर्चा में है. जहां एक तरफ हजारों आईटी प्रोफेशनल्स दिन-रात लैपटॉप और कोडिंग की दुनिया में व्यस्त रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर के कई इलाकों में तेंदुए के दिखने की खबरों ने दहशत पैदा कर दी है. बीते कुछ समय से पुणे और उसके आसपास के इलाकों में बार-बार तेंदुए देखे जाने की घटनाएं सामने आई हैं. जंगलों से सटे रिहायशी इलाकों, खाली प्लॉट्स और झाड़ियों वाले क्षेत्रों में तेंदुए की मौजूदगी की खबरों ने आम लोगों के साथ-साथ कॉर्पोरेट कंपनियों की चिंता भी बढ़ा दी है. खासतौर पर आईटी पार्क्स में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह एक नया और असामान्य खतरा बनकर उभरा है, क्योंकि कई कंपनियों में देर रात और नाइट शिफ्ट में काम करना आम बात है. इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए देश की बड़ी आईटी कंपनी Cognizant ने अपने कर्मचारियों के लिए एक सख्त सेफ्टी एडवाइजरी जारी की है, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके.

Cognizant की एडवाइजरी: ‘सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा’

Cognizant की ओर से जारी एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि भले ही हिंजवड़ी जैसे प्रमुख आईटी इलाकों में अभी तेंदुए के सीधे देखे जाने की पुष्टि नहीं हुई हो, लेकिन आसपास के क्षेत्रों में हुई घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कंपनी ने कर्मचारियों को आगाह किया है कि वे अंधेरा होने के बाद या सूर्योदय से ठीक पहले अकेले बाहर निकलने से बचें. एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि पैदल चलने के बजाय ऑफिस ट्रांसपोर्ट, कारपूलिंग या शेयर कैब का ही इस्तेमाल करें. कंपनी का मानना है कि अकेले और सुनसान रास्तों पर चलना जोखिम को कई गुना बढ़ा सकता है. इसके अलावा झाड़ियों, जंगल से सटे इलाकों और शॉर्टकट रास्तों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है. खासतौर पर देर शाम, रात और तड़के फेज-2 कैंपस में बिना जरूरत जाने से बचने को कहा गया है. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश अस्थायी नहीं, बल्कि कर्मचारियों की जान-माल की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी कदम हैं.

तेंदुआ दिखे तो क्या करें: ‘घबराएं नहीं, भागें नहीं’

इस एडवाइजरी का सबसे अहम और चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि यदि तेंदुआ दिखाई दे, तो घबराने या दौड़ने की बिल्कुल कोशिश न करें. कंपनी ने कर्मचारियों को समझाया है कि अचानक की गई हरकतें, तेज आवाज या दौड़ना तेंदुए को उकसा सकता है, जिससे खतरा और बढ़ सकता है. इसके बजाय शांत रहने, दूरी बनाए रखने और तुरंत सुरक्षा टीम को सूचना देने की सलाह दी गई है. Cognizant ने अपने सुरक्षा कर्मियों को भी अलर्ट पर रखा है और कहा है कि कर्मचारियों को सुरक्षा टीम द्वारा दिए गए हर निर्देश का पालन करना अनिवार्य होगा. यदि किसी को संदिग्ध जानवर की हलचल दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत रिपोर्ट करने को कहा गया है. कंपनी का यह कदम इस बात को दिखाता है कि अब कॉर्पोरेट सेक्टर भी केवल साइबर सिक्योरिटी नहीं, बल्कि फिजिकल सेफ्टी को लेकर भी गंभीर हो गया है.

शहर, जंगल और विकास के बीच टकराव की कहानी

पुणे में तेंदुए की बढ़ती मौजूदगी केवल एक आईटी कंपनी की चिंता नहीं है, बल्कि यह शहर और जंगल के बीच बढ़ते टकराव की एक बड़ी तस्वीर भी पेश करती है. तेजी से हो रहे शहरीकरण, जंगलों के सिमटने और प्राकृतिक आवास में कमी के चलते जंगली जानवर अब रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं. आईटी पार्क्स, हाउसिंग सोसायटी और हाइवे अब उन इलाकों में बन चुके हैं, जो कभी जंगल हुआ करते थे. ऐसे में तेंदुओं का शहर की ओर आना कोई हैरानी की बात नहीं रह गई है. Cognizant की एडवाइजरी इस बदलती हकीकत का संकेत है, जहां कर्मचारियों को अब ऑफिस टाइमिंग के साथ-साथ जंगल के नियम भी समझने पड़ रहे हैं. ‘तेंदुआ दिखे तो भागना मना है’ जैसी लाइनें अब सिर्फ वन्यजीव विशेषज्ञों की सलाह नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट ईमेल का हिस्सा बन चुकी हैं. यह घटना आने वाले समय में दूसरी कंपनियों के लिए भी एक चेतावनी हो सकती है कि कर्मचारियों की सुरक्षा अब सिर्फ ऑफिस परिसर तक सीमित नहीं रही.

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