देशभर में चर्चा में रहे राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। मेघालय पुलिस ने इस मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पुलिस ने अपनी याचिका में कहा है कि यदि जमानत पर रोक नहीं लगाई गई तो आरोपी के फरार होने की आशंका है। इस मामले में सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामले को शुक्रवार की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। अब इस हाई-प्रोफाइल केस में सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।
हनीमून के दौरान हुई थी राजा रघुवंशी की मौत
मामले की शुरुआत मई 2025 में हुई थी, जब इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी सोनम रघुवंशी से हुई। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून मनाने मेघालय गए। यात्रा के दौरान चेरापूंजी क्षेत्र में राजा अचानक लापता हो गए। बाद में उनकी लाश एक गहरी खाई से बरामद हुई। पुलिस जांच के बाद इस मामले में सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या समेत कई गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह घटना पहले से बनाई गई योजना के तहत अंजाम दी गई थी। इसके बाद जून 2025 में सोनम को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया और मामले की जांच आगे बढ़ी।
पुलिस की दस्तावेजी गलती बनी जमानत की वजह
इस मामले में पुलिस ने अदालत में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में हुई कुछ गंभीर त्रुटियां अदालत के सामने बड़ा मुद्दा बन गईं। गिरफ्तारी मेमो में हत्या से संबंधित सही कानूनी धारा की जगह दूसरी धारा लिख दी गई। इतना ही नहीं, कुछ अन्य विवरण भी गलत दर्ज किए गए थे। निचली अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को सही कानूनी जानकारी नहीं देना उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसी आधार पर अदालत ने सोनम रघुवंशी को सशर्त जमानत दे दी। बाद में राज्य सरकार ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली और अपील खारिज कर दी गई।
अब सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला
अब मेघालय पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि गिरफ्तारी मेमो में हुई गलतियां जानबूझकर नहीं थीं, बल्कि यह केवल तकनीकी और टाइपिंग संबंधी चूक थी। पुलिस का कहना है कि इतने गंभीर हत्या के मामले में केवल दस्तावेजी त्रुटि के आधार पर जमानत देना उचित नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान पर्याप्त सबूत जुटाए गए हैं और आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं, इसलिए जमानत पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, अदालत अब दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तय करेगी कि जमानत आदेश बरकरार रहेगा या उस पर रोक लगाई जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।
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