सावन के महीने में प्रकृति की हरियाली के बीच मनाया जाने वाला हरियाली तीज का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए साल का सबसे बड़ा और पवित्र उत्सव माना जाता है। इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा और योग्य वर पाने के लिए देवी पार्वती और भगवान शिव की विशेष आराधना करती हैं। इस बार सावन मास का शुभारंभ 30 जुलाई से हो चुका है और इसके साथ ही तीज-त्योहारों की रौनक हर तरफ देखने को मिल रही है। हालांकि, इस साल तिथियों के फेर और उदयातिथि के कारण तीज की सटीक तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ी उत्सुकता बनी हुई है, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं ने इसके सही समय पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।
जानिए तृतीया तिथि और व्रत का सटीक गणित
वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 14 अगस्त 2026 की शाम को 6 बजकर 46 मिनट पर होने जा रहा है। यह तिथि अगले दिन यानी 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि सनातन धर्म में व्रत और पूजा-पाठ से जुड़े कार्य उदयातिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) के आधार पर तय किए जाते हैं, इसलिए हरियाली तीज का पावन व्रत 15 अगस्त 2026, शनिवार को ही रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, सूर्योदय के समय तृतीया तिथि का विद्यमान होना इस व्रत के फल को कई गुना बढ़ा देता है। यही वजह है कि पूरे देश में महिलाएं इसी दिन पूरे भक्ति भाव से निर्जला उपवास रखकर माता पार्वती की शरण में होंगी।
3 दुर्लभ शुभ योगों का महासंगम बनाएगा पूजा को फलदायी
इस साल की हरियाली तीज केवल व्रत की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय महासंयोग के कारण भी बेहद खास मानी जा रही है। 15 अगस्त को एक नहीं, बल्कि तीन-तीन अत्यंत शुभ योगों का अद्भुत तालमेल बन रहा है। इस दिन ‘शिव योग’, ‘सिद्ध योग’ और ‘रवि योग’ का त्रिवेणी संगम हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, शिव और सिद्ध योग में की गई महादेव की पूजा कभी निष्फल नहीं जाती और साधक की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं। पूजा-पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:50 से 05:35 बजे तक रहेगा, जबकि दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12:17 से 01:08 बजे तक और विजय मुहूर्त 02:51 से 03:42 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, शाम को गोधूलि मुहूर्त 07:06 से 07:29 बजे के बीच तथा अमृत काल रात 08:18 से 09:53 बजे तक रहेगा, जो मंत्र जाप और आरती के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है।
इस विधि से करें माता पार्वती और शिव जी का पूजन
हरियाली तीज की पूजा में विधि-विधान का बड़ा महत्व होता है। व्रत वाले दिन महिलाओं को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि के पश्चात हरे रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए, क्योंकि सावन में हरा रंग प्रकृति और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें। मिट्टी से भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमाएं बनाकर उन्हें हरे कपड़े से सजी चौकी पर स्थापित करें। पूजा के दौरान अक्षत, चंदन, दूर्वा, बेलपत्र और भांग-धतूरा अर्पित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री और कुमकुम अवश्य चढ़ाएं। कथा सुनने के बाद धूप-दीप से आरती करें और रात्रि में जागरण करते हुए भजन-कीर्तन करें। अगले दिन चतुर्थी तिथि पर स्नान-ध्यान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत का पारण करें।
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