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खुद को ‘मुर्दा’ साबित करने की साजिश: AI से बनाई चिता की तस्वीर, बकरे का किया अंतिम संस्कार; डेढ़ साल बाद ऐसे खुला राज!

मऊ में हत्या के आरोपी ने AI की मदद से चिता की तस्वीर और बकरे के अंतिम संस्कार का वीडियो बनाकर खुद को मृत घोषित कराया। डेढ़ साल बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार।

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उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक ऐसा हैरान कर देने वाला और फिल्मी कहानी से भी ज्यादा रोमांचक मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया है। कानून के शिकंजे से बचने के लिए एक शातिर अपराधी ने अपनी ही मौत की ऐसी झूठी और शातिर कहानी रची, जिस पर किसी को आसानी से यकीन न हो। आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करते हुए खुद के अंतिम संस्कार की तस्वीरें और वीडियो तैयार करवाए। डेढ़ साल तक पुलिस को अपनी मौत का झांसा देकर फरार चल रहा यह शातिर आखिरकार मऊ पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम के हत्थे चढ़ ही गया। सर्विलांस और तकनीकी मदद से पुलिस ने जब इस शातिर की सुरागकशी की, तो उसकी हर एक चालाकी की परतें एक-एक कर खुलने लगीं।

हत्या के मुकदमे के ट्रायल से बचने और निवेशकों के करोड़ों का था खेल

पुलिस की गिरफ्त में आए इस शातिर आरोपी की पहचान राजू उर्फ राजकुमार राजभर (38 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मऊ के थाना कोतवाली नगर अंतर्गत ख्वाजा जहांपुर का रहने वाला है। मामले की तह में जाएं तो यह पूरा षड्यंत्र एक पुराने गंभीर अपराध से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2016 में मुंशीपुरा रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह नाम के एक शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद मृतक के भतीजे की शिकायत पर राजू और उसके एक साथी सुदर्शन राजभर के खिलाफ कोतवाली नगर में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में आईपीसी की धारा 302 के तहत कानूनी ट्रायल चल रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी इंटरमीडिएट की परीक्षा भी पास नहीं कर सका था, लेकिन वह शेयर बाजार में ट्रेडिंग का काम करता था। उसने कई शहरों के प्रतिष्ठित लोगों से बड़ी रकम लेकर शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी की थी। सजा से बचने और लोगों के पैसे वापस न लौटने पड़ें, इसलिए उसने अपनी मौत का यह नायाब और शातिर षड्यंत्र रचा।

एआई से तैयार की श्मशान घाट की तस्वीरें और किया बकरे का अंतिम संस्कार

अपनी मौत की पटकथा को पुख्ता करने के लिए आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से डिजिटल टूल्स का सहारा लिया। उसने 30 मई 2025 को गाजीपुर में खुद को मृत दिखाने की योजना पर काम शुरू किया। सबसे पहले उसने आधुनिक एआई तकनीक की मदद से श्मशान घाट पर चिता पर लेटे हुए शव की एक यथार्थवादी तस्वीर बनवाई। बात यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि अपनी इस झूठी मौत को असलियत का जामा पहनाने के लिए उसने एक बकरे की अंत्येष्टि का वीडियो तक तैयार कर लिया। इन फर्जी डिजिटल साक्ष्यों और तस्वीरों के आधार पर उसने नगर पालिका मऊ से अपना फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी करवा लिया। इसके बाद इन सभी कागजातों को न्यायालय में पेश कर खुद को मृत घोषित कराने का प्रयास किया गया और वह पुलिस व कानून की नजरों से बचकर भूमिगत हो गया।

नए मुकदमों के साथ शिकंजा कसा, पुलिस ने ऐसे किया पर्दाफाश

हालांकि, झूठ की बुनियाद ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकती और कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। मऊ पुलिस ने जब इस हाई-प्रोफाइल और अनोखे मामले की गहराई से जांच शुरू की, तो सारे फर्जीवाड़े की कलई खुल गई। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ फर्जी दस्तावेज और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में कोतवाली नगर में नया मुकदमा अपराध संख्या 294/2026 दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस की इस मुस्तैदी और तकनीकी सर्विलांस ने आखिरकार एक शातिर अपराधी के नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया है, जो कानून की आंखों में धूल झोंककर खुलेआम घूम रहा था।

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