संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की पाकिस्तान यात्रा को पहले आधिकारिक और अहम बताया जा रहा था, लेकिन अब सामने आ रही जानकारियों ने इस दौरे को पाकिस्तान के लिए असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। शुक्रवार को जब UAE राष्ट्रपति पाकिस्तान पहुंचे, तो रावलपिंडी एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार मौजूद थे। तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनसे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हैं।
लेकिन असली कहानी इसके बाद सामने आई। बताया जा रहा है कि शेख मोहम्मद बिन जायद ने इस्लामाबाद जाने से साफ इनकार कर दिया और सभी औपचारिक बातचीत एयरपोर्ट तक ही सीमित रही। आमतौर पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की यात्रा में राजधानी जाकर विस्तृत बैठकें, डिनर डिप्लोमेसी और साझा बयान देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इसी वजह से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह वास्तव में एक पूर्ण आधिकारिक यात्रा थी या केवल औपचारिकता निभाई गई।
निजी कार्यक्रमों को तरजीह
इस पूरी यात्रा का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि UAE राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी नेतृत्व को बहुत कम समय दिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और टीवी डिबेट्स में दावा किया गया कि एयरपोर्ट पर कुछ देर बातचीत के बाद शेख मोहम्मद बिन जायद अपने निजी कार्यक्रमों के लिए रवाना हो गए। न कोई लंबी बैठक, न साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस और न ही किसी बड़े समझौते की घोषणा।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी मित्र देश के राष्ट्रपति का इस तरह व्यवहार करना असामान्य माना जाता है। आम तौर पर UAE और पाकिस्तान के संबंध आर्थिक सहयोग, निवेश और सुरक्षा मामलों में मजबूत बताए जाते रहे हैं। ऐसे में इस यात्रा का इतना सीमित रहना कई तरह के संकेत देता है। कुछ विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि यह संदेश है कि UAE फिलहाल पाकिस्तान को उतनी प्राथमिकता नहीं दे रहा जितनी पहले दी जाती थी।
टीवी शो में मंत्री का कबूलनामा, बढ़ी शर्मिंदगी
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने खुद टीवी कार्यक्रम में इस बात को स्वीकार कर लिया। एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल पर चर्चा के दौरान एंकर ने सवाल उठाया कि क्या UAE राष्ट्रपति इस्लामाबाद आए भी थे या सारी बैठकें एयरपोर्ट पर ही निपट गईं। इस पर शहबाज शरीफ सरकार में मंत्री अहसान इकबाल ने गोलमोल जवाब देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने यह मान लिया कि शेख मोहम्मद बिन जायद ने पाकिस्तानी नेताओं को ज्यादा वक्त नहीं दिया।
इस स्वीकारोक्ति के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने इसे पाकिस्तान की विदेश नीति की नाकामी बताया, तो कुछ ने सवाल उठाया कि जब यात्रा इतनी सीमित थी तो इसे आधिकारिक दौरा क्यों कहा गया। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की साख को नुकसान पहुंचाने वाला मामला है।
कूटनीतिक संदेश या सोची-समझी दूरी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि UAE राष्ट्रपति का यह रवैया किसी खास कूटनीतिक संदेश का हिस्सा था या फिर यह केवल उनके निजी कार्यक्रमों की मजबूरी थी। हालांकि, जिस तरह से उन्होंने इस्लामाबाद आने से इनकार किया और शीर्ष नेतृत्व से केवल औपचारिक मुलाकात की, उसने कई अटकलों को जन्म दे दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ऐसे संकेत बहुत मायने रखते हैं। किसी देश के राष्ट्रपति का राजधानी न जाना यह दर्शा सकता है कि संबंधों में ठंडापन है या फिर फिलहाल उस देश को प्राथमिकता सूची में नीचे रखा गया है। पाकिस्तान के संदर्भ में यह घटना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि देश पहले से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक दबावों से जूझ रहा है। ऐसे समय में किसी करीबी माने जाने वाले देश के राष्ट्रपति की यह दूरी सरकार के लिए बड़ी किरकिरी बन गई है।
