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बांग्लादेश में कोहराम: 7 साल की मासूम बच्ची को जिंदा जलाया, हिंदुओं पर बढ़ते हमले और यूनुस सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम

बांग्लादेश में हिंसा भड़की। मासूम बच्ची की मौत, हिंदू युवक दीपू दास की हत्या और इंकलाब मंच का 24 घंटे का अल्टीमेटम। भारत में भी विरोध प्रदर्शन तेज। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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बांग्लादेश में पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसा ने अब एक अत्यंत भयावह रूप ले लिया है। ताजा घटनाओं में मानवता को शर्मसार करने वाली एक वारदात सामने आई है, जहाँ लक्ष्मीपुर सदर उपजिला में बीएनपी नेता के घर को बाहर से बंद कर आग लगा दी गई। इस भीषण अग्निकांड में एक 7 साल की मासूम बच्ची की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। यह घटना दर्शाती है कि वहां कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और अराजक तत्व किसी को भी निशाना बना रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना चरम पर है कि वे रास्ते में आने वाली हर चीज़ को आग के हवाले कर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

हिंदू युवक दीपू दास की हत्या और भारत में बढ़ता आक्रोश

बांग्लादेश के मयमनसिंह शहर से आई एक और खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की ईशनिंदा के झूठे आरोप में सरेआम पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और बाद में उसके शव को जला दिया गया। इस निर्मम हत्याकांड की गूँज भारत में भी सुनाई दे रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के छात्रों ने इस घटना के विरोध में मार्च निकाला और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस का पुतला फूँका। कोलकाता में भी ‘बांग्ला पोक्खो’ जैसे संगठनों ने बांग्लादेश उप उच्चायोग तक विरोध मार्च निकालकर वहां हो रहे हिंदू विरोधी अत्याचारों को रोकने की मांग की है। भारत में लोग इस बात को लेकर बेहद गुस्से में हैं कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा रही है।

सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम

हिंसा की ताजा लहर युवा नेता और ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद और तेज हुई है। हादी के अंतिम संस्कार के बाद उनके समर्थकों और इंकलाब मंच ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हादी की हत्या के दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और इस मामले में ‘स्पष्ट प्रगति’ दिखाई दे। सिलहट और ढाका जैसे शहरों में तनाव इतना अधिक है कि भारतीय सहायक उच्चायोग और वीजा केंद्रों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि प्रदर्शनों की आड़ में ‘तीसरा पक्ष’ स्थिति का फायदा उठाकर अशांति और बढ़ा सकता है।

मीडिया पर हमले और पश्चिम बंगाल पुलिस की सतर्कता

हिंसा का असर अब मीडिया संस्थानों पर भी दिखने लगा है। प्रदर्शनकारियों ने ‘डेली स्टार’ और ‘प्रोथोम आलो’ जैसे प्रमुख अखबारों के दफ्तरों में तोड़फोड़ की है और कई पत्रकारों के साथ मारपीट की गई है। इस बीच, सीमा पार पश्चिम बंगाल में भी तनाव फैलने की आशंका को देखते हुए बंगाल पुलिस ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से बचने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि कुछ शरारती तत्व बांग्लादेश की घटनाओं को पुरानी स्थानीय घटनाओं से जोड़कर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल, पूरा बांग्लादेश एक बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है, जहाँ 24 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

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