खगोलीय घटनाओं के लिहाज से साल 2026 बेहद खास रहा है और अब इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने में बहुत कम दिन बाकी हैं। जानकारी के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण अगस्त के महीने में ही लगने जा रहा है। भारतीय समयानुसार, साल का यह दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 28 अगस्त की रात 9:02 बजे से शुरू होकर अगली सुबह 4:08 बजे तक रहेगा। चूँकि ग्रहण के समय भारत में गहरी रात होगी, इसलिए यह अद्भुत खगोलीय नजारा यहाँ दिखाई नहीं देगा। दुनिया के अन्य देशों जैसे ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और उत्तरी रूस के कुछ चुनिंदा हिस्सों में ही इसे साफ तौर पर देखा जा सकेगा।
सूतक काल के नियम और धार्मिक मान्यताएं
हिंदू सनातन धर्म में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण जैसी घटनाओं का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल का आरंभ हो जाता है, जो ग्रहण के मोक्ष यानी समाप्ति के साथ ही पूरा होता है। इस समयावधि के दौरान धार्मिक मान्यताओं के तहत कई तरह के कड़े प्रतिबंध लग जाते हैं। सूतक काल में भोजन पकाने और खाने की मनाही होती है, मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी तरह के शुभ कार्यों को करना वर्जित माना जाता है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को भी विशेष सावधानी बरतने और घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है ताकि नकारात्मक ऊर्जा के प्रभावों से बचा जा सके।
क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
आमजन के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि जब ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, तो क्या यहाँ भी सूतक के नियम लागू होंगे? ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, सूतक काल तभी प्रभावी माना जाता है जब वह ग्रहण संबंधित भौगोलिक क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दे। चूंकि 28 अगस्त को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारतीय भूभाग पर नजर नहीं आएगा, इसलिए देश में इसका कोई भी धार्मिक सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसके कारण भारत में सूतक काल से जुड़े सभी प्रतिबंध पूरी तरह बेअसर रहेंगे और आम जनता बिना किसी रोक-टोक के अपने सामान्य दैनिक कार्य और पर्व मना सकेगी।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रभाव से जुड़ी बातें
धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक तर्कों में हमेशा से ही एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है। विज्ञान की दृष्टि से सूर्य ग्रहण एक विशुद्ध खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरते हुए सूर्य के प्रकाश को कुछ समय के लिए आंशिक या पूर्ण रूप से रोक लेता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का संचार नहीं होता और न ही गर्भवती महिलाओं पर इसका कोई घातक शारीरिक प्रभाव पड़ता है। हालांकि, नंगी आँखों से सीधे सूर्य ग्रहण को देखना आँखों की रोशनी के लिए खतरनाक हो सकता है, जिसके लिए विशेष सोलर फिल्टर या चश्मों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
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