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8 महीने की गर्भवती, प्रचार में गिरी बेहोश… फिर भी जीत गई चुनाव, कौन हैं TVK की ‘फाइटर’ पल्लवी?

8 महीने की गर्भवती होते हुए चुनाव प्रचार करने वाली TVK उम्मीदवार एमआर पल्लवी की प्रेरणादायक कहानी। जानें कैसे बेहोश होने के बाद भी जीता चुनाव।

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने इस बार कई नई और प्रेरणादायक कहानियों को जन्म दिया है। Thalapathy Vijay की पार्टी TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीतकर खुद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित किया। इस जीत के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—एमआर पल्लवी। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली पल्लवी ने अपनी हिम्मत और जज्बे से यह साबित कर दिया कि राजनीति में सफलता सिर्फ बड़े नाम या अनुभव से नहीं, बल्कि मेहनत और भरोसे से भी मिलती है।

गर्भावस्था में किया प्रचार

एमआर पल्लवी उस समय सुर्खियों में आईं, जब यह सामने आया कि वह चुनाव प्रचार के दौरान 8 महीने की गर्भवती थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने क्षेत्र में लगातार लोगों से संपर्क किया और घर-घर जाकर वोट मांगे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक बार प्रचार के दौरान वह अचानक बेहोश हो गई थीं, जिससे उनके परिवार और समर्थकों की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, थोड़ी देर आराम करने के बाद उन्होंने फिर से प्रचार शुरू कर दिया। उनके इस समर्पण और हिम्मत ने मतदाताओं के दिल पर गहरा असर डाला, जिसका परिणाम चुनाव में उनकी जीत के रूप में सामने आया।

शानदार जीत और सादगी भरी पृष्ठभूमि

थिरु वी का नगर सीट से चुनाव लड़ते हुए पल्लवी ने अपने प्रतिद्वंदी K. S. Ravichandran को 22,333 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उनकी शिक्षा केवल 12वीं तक है, लेकिन उनके आत्मविश्वास और मेहनत ने उन्हें बड़ी सफलता दिलाई। पल्लवी का यह सफर दिखाता है कि राजनीति में अब आम लोगों के लिए भी जगह बन रही है। उनकी जीत को राजनीतिक विश्लेषक एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं, जहां मतदाता नए चेहरों और जमीनी स्तर के नेताओं को मौका दे रहे हैं।

जीत के बाद आराम, परिवार में खुशियां

चुनाव जीतने के बाद पल्लवी ने फिलहाल मीडिया से दूरी बना ली है, क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है। उनके पति के अनुसार, जल्द ही उन्हें अस्पताल में भर्ती होना है, क्योंकि वह अपनी दूसरी संतान को जन्म देने वाली हैं। इस बीच उनका परिवार नए मेहमान के स्वागत की तैयारियों में जुटा है। पल्लवी की कहानी सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और उम्मीद की मिसाल बन गई है, जो आने वाले समय में कई लोगों को प्रेरित कर सकती है।

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