कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कानपुर से चार बार सांसद रहे श्रीप्रकाश जायसवाल का शुक्रवार देर शाम 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से चल रही स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनकी हालत कई दिनों से नाजुक बनी हुई थी। जानकारी के मुताबिक अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें कानपुर के कार्डियोलॉजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई और विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि व्यक्त की।
स्थानीय राजनीति से शुरू हुआ सफर, बने राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेता
25 सितंबर 1944 को कानपुर में जन्में श्रीप्रकाश जायसवाल ने अपना राजनीतिक सफर स्थानीय कांग्रेस संगठन से शुरू किया। वे शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने और उसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी में संयुक्त सचिव के पद तक पहुंचे। संगठन में मजबूत पकड़ और जनता से जुड़ाव ने जल्द ही उन्हें बड़े मंचों तक पहुंचाया। 1990 के दशक में वे पहली बार कानपुर लोकसभा सीट से संसद पहुंचे। इसके बाद 1996, 2004 और 2009 में भी जनता ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा चुनकर संसद भेजा। उनके कार्यकाल में विकास कार्यों, संसदीय बहसों और क्षेत्रीय समस्याओं को उठाने में उनकी सक्रियता अक्सर चर्चा में रहती थी।
मनमोहन सरकार में मिली बड़ी जिम्मेदारियाँ, कोयला मंत्रालय में दी अहम भूमिका
श्रीप्रकाश जायसवाल का राजनीतिक करियर यूपीए सरकार में अपने चरम पर पहुंचा, जब उन्हें केंद्र की मनमोहन सिंह कैबिनेट में अहम जिम्मेदारियाँ दी गईं। 2004 से 2009 तक उन्होंने गृह राज्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद 2009 से 2014 के बीच उन्हें केंद्रीय कोयला मंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता और विकास के लिए कई अहम फैसले लिए। उनके समर्थकों का कहना है कि वे हमेशा जनता के लिए उपलब्ध रहते थे और क्षेत्रीय विकास में विशेष रुचि रखते थे।
नेताओं ने जताया दुख, कानपुर में कल अंतिम विदाई
पूर्व मंत्री के निधन के बाद देशभर से शोक संदेश आने लगे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रधानमंत्री समेत कई प्रमुख नेताओं ने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि जायसवाल का जाना पार्टी और देश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनकी सेवाओं को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। कानपुर में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त शोकसभा आयोजित करने की घोषणा की है। परिवार के अनुसार, शनिवार सुबह कानपुर में ही उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके जाने से कानपुर की राजनीति और कांग्रेस संगठन में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।
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