महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के दूसरे खेमे के संपर्क में होने की चर्चाओं के बीच पार्टी नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने उन सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजा है, जो हाल ही में आयोजित संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। पार्टी का कहना है कि सभी सांसदों को बैठक की जानकारी पहले ही दे दी गई थी, इसके बावजूद कई नेता मौजूद नहीं रहे।
24 घंटे में मांगी गई सफाई
पार्टी के मुख्य सचिव अनिल देसाई की ओर से जारी नोटिस में सांसदों से 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया है। नोटिस में पूछा गया है कि पार्टी के निर्देश के बावजूद वे बैठक में क्यों नहीं पहुंचे। साथ ही यह भी कहा गया है कि अनुपस्थिति की कोई जानकारी पार्टी नेतृत्व को नहीं दी गई। पार्टी ने इस मामले को अनुशासनहीनता और संगठन विरोधी गतिविधि मानते हुए सांसदों से स्पष्ट जवाब मांगा है।
जवाब नहीं मिलने पर बढ़ सकती है मुश्किल
पार्टी ने साफ कर दिया है कि तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे सांसदों के खिलाफ संगठनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। साथ ही दल-बदल कानून के तहत भी स्थिति की समीक्षा की जा सकती है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि पार्टी के भीतर कई सांसदों की नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं।
उद्धव ठाकरे ने दिए भावुक संकेत
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भावुक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक चुनौतियों और मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने संगठन को मजबूत रखने की कोशिश की है। हालांकि, अगर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके नेतृत्व पर भरोसा नहीं है, तो वह अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए भी तैयार हैं। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के सामने यह दूसरा बड़ा संकट माना जा रहा है। अब सबकी नजर बागी सांसदों के जवाब और पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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