झारखंड में राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में अचानक बड़ा उबाल देखने को मिला है। क्रॉस वोटिंग और परिणामों के बाद जहां कांग्रेस को करारा झटका लगा है, वहीं अब राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को और गर्म कर दिया है। इसी बीच एनडीए खेमे से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक अप्रत्याशित राजनीतिक ऑफर मिलने से चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बयान ने राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलों को जन्म दे दिया है और महागठबंधन की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्रॉस वोटिंग से बिगड़ा खेल, राज्यसभा चुनाव में उलटफेर
झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। कुल 81 सदस्यीय विधानसभा में जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत थी। चुनाव में क्रॉस वोटिंग के चलते समीकरण पूरी तरह बदल गए। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज की, जो तीसरी बार राज्यसभा पहुंचे हैं। वहीं कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ और उसके उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैद्यानाथ राम ने अपनी सीट बचाने में सफलता हासिल की। इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।
NDA का बड़ा ऑफर—कांग्रेस को हटाकर सरकार चलाने की सलाह
राजनीतिक तनाव के बीच जेडीयू और एनडीए विधायक सरयू राय के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुझाव देते हुए कहा कि कांग्रेस को सरकार से बाहर कर देना चाहिए और एनडीए के साथ मिलकर राज्य में सरकार चलाई जा सकती है। उनके अनुसार मौजूदा महागठबंधन में दरार साफ दिखाई दे रही है और यह गठबंधन कभी भी पूरी तरह टूट सकता है। इस बयान के बाद झारखंड की राजनीति में नए गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है और विपक्षी खेमों में हलचल बढ़ गई है।
क्या बिना कांग्रेस और बीजेपी के चल सकती है सरकार?
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। वर्तमान में झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 34 विधायक हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार अगर कांग्रेस और बीजेपी को अलग रख दिया जाए तो भी जोड़-तोड़ से सरकार बनाने की संभावना दिखाई देती है। आरजेडी के चार विधायक, भाकपा (माले) के दो विधायक और सरयू राय के समर्थन को जोड़कर एक नया समीकरण बनाया जा सकता है, जिससे बहुमत का आंकड़ा पार किया जा सकता है। यही गणित अब राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है।
महागठबंधन में दरार के संकेत, आगे क्या होगा?
राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस खेमे में नाराजगी खुलकर सामने आई है। झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू ने आरोप लगाया कि गठबंधन के सहयोगियों ने ही पार्टी को अपेक्षित समर्थन नहीं दिया, जिससे हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरजेडी और भाकपा (माले) पर धोखा देने के आरोप भी लगाए हैं। वहीं क्रॉस वोटिंग और वोट अमान्य होने की घटनाओं ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। कुल मिलाकर महागठबंधन में आंतरिक तनाव अब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगा है। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावनाएं पूरी तरह से खारिज नहीं की जा सकतीं।
Read More-कुएं के किनारे झूलती बस… 40 बच्चों की सांसें अटकीं, क्या एक सेकेंड की देरी बन जाती मौत?
