20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले राजनीतिक माहौल गर्म होता दिखाई दे रहा है। चर्चा है कि केंद्र सरकार लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधित संविधान संशोधन विधेयक को फिर से संसद में ला सकती है। इसी संभावना को लेकर कांग्रेस ने अपनी आपत्ति जताई है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी राजनीतिक दलों को भरोसे में लिया जाना चाहिए और संसद में बिल पेश करने से पहले व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
खरगे बोले- पहले सभी दलों को बताई जाए सरकार की योजना
अपने पत्र में खरगे ने कहा कि वह पहले भी सरकार से अनुरोध कर चुके हैं कि परिसीमन और उससे जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सभी दलों की बैठक बुलाई जाए। उनका आरोप है कि सरकार ने अब तक इस मांग पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। खरगे ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से जानकारी मिल रही है कि सरकार मानसून सत्र में संशोधित विधेयक दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में विपक्षी दलों को प्रस्तावित बदलावों की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे उनका अध्ययन कर सकें। कांग्रेस का मानना है कि लोकतंत्र में बड़े संवैधानिक बदलावों पर सहमति और संवाद जरूरी है। इसी वजह से पार्टी लगातार सर्वदलीय चर्चा की मांग कर रही है।
कांग्रेस ने किया विरोध का ऐलान
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यदि परिसीमन विधेयक संसद में पेश किया जाता है तो वह उसका जोरदार विरोध करेगी। पार्टी का कहना है कि इस विषय पर अभी कई सवाल बाकी हैं, जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए। इसके अलावा कांग्रेस मानसून सत्र में कई अन्य मुद्दों को भी उठाने की तैयारी कर रही है। इनमें विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं, एथनॉल नीति, विदेश नीति से जुड़े सवाल और राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद जैसे विषय शामिल हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि इन मामलों पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए। कांग्रेस यह भी दावा कर रही है कि लोकसभा में सरकार के पास इतना समर्थन नहीं है कि वह आसानी से दो-तिहाई बहुमत हासिल कर सके।
सोनिया गांधी के आवास पर बनी रणनीति
मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर हुई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश और कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार बैठक में यह तय किया गया कि संसद के भीतर और बाहर विपक्षी दलों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा। कांग्रेस चाहती है कि विपक्ष एकजुट होकर सरकार के प्रस्तावों पर अपनी राय रखे। पार्टी का मानना है कि परिसीमन जैसे मुद्दों का असर देश की राजनीतिक व्यवस्था और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है, इसलिए इस पर व्यापक बहस जरूरी है। अब सबकी नजर 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र पर है, जहां इस मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
