महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति लगातार गर्म बनी हुई है। संसद में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल (Jagdambika Pal) ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि विरोधी दल एक तरफ महिला आरक्षण का समर्थन करने की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ इसे लागू होने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह दोहरी राजनीति है, जिसे जनता अब समझ रही है। पाल के मुताबिक, महिला आरक्षण सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने का एक ऐतिहासिक कदम है, जिसे बिना देरी लागू किया जाना चाहिए।
‘सरकार का लक्ष्य 2029 से पहले लागू करना’
जगदंबिका पाल (Jagdambika Pal) ने सरकार की मंशा को स्पष्ट करते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस बिल को जल्द से जल्द लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सरकार ने यह तय किया है कि महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 से पहले सुनिश्चित किया जाए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए संशोधन विधेयक लाया गया है। पाल ने कहा कि पहले जो कानून पारित हुआ था, उसमें जनगणना और परिसीमन की कोई स्पष्ट समय सीमा नहीं थी, जिससे इसके लागू होने में देरी हो सकती थी। अब सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार किया है, ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके और महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।
विपक्ष पर ‘इरादों’ को लेकर सवाल
बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल (Jagdambika Pal) ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों का रवैया विरोधाभासी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यही दल पहले भी महिला आरक्षण को लागू होने से रोक चुके हैं। पाल ने 2010 के उस दौर का जिक्र किया, जब महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ था, लेकिन लोकसभा में इसे मंजूरी नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि उस समय कुछ दलों ने समर्थन वापस लेने की चेतावनी दी थी, जिसके कारण बिल आगे नहीं बढ़ सका। आज भी वही दल समर्थन की बात करते हुए अलग-अलग शर्तें जोड़कर इस प्रक्रिया को धीमा करना चाहते हैं। पाल के मुताबिक, अगर विपक्ष वास्तव में महिला आरक्षण के पक्ष में है, तो उसे बिना शर्त इस बिल का समर्थन करना चाहिए।
परिसीमन और जनगणना पर जारी बहस
महिला आरक्षण विधेयक के साथ-साथ परिसीमन और जनगणना का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में है। विपक्ष का कहना है कि बिना नई जनगणना और स्पष्ट परिसीमन प्रक्रिया के इस बिल को लागू करना सही नहीं होगा। वहीं सरकार का तर्क है कि 2011 के आंकड़ों के आधार पर भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है, ताकि देरी न हो। जगदंबिका पाल ने कहा कि परिसीमन राज्यों के स्तर पर किया जाएगा और इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को उनका हक दिलाना है, न कि किसी राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल करना। अब यह देखना अहम होगा कि संसद में इस बहस का क्या नतीजा निकलता है और क्या सभी दल मिलकर इस ऐतिहासिक बिल को पास कर पाते हैं।
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