सोशल मीडिया पर चल रहे ‘आरक्षण हटाओ’ अभियान को लेकर राजनीति तेज होती दिखाई दे रही है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इस अभियान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट, जो संविधान और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ माहौल बना रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। अठावले का कहना है कि ऐसे अभियान समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
IT मंत्री से मुलाकात का किया ऐलान
रामदास अठावले ने बताया कि वह जल्द ही केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि वह सोशल मीडिया पर चल रहे बेनामी और कथित देश-विरोधी अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे। उनके अनुसार, ऐसे अकाउंट्स की पहचान कर कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जाने चाहिए। अठावले ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल समाज में नफरत फैलाने या लोगों को भड़काने के लिए नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार के सामने इस तरह की गतिविधियों को रोकना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है।
‘आरक्षण हटाओ’ अभियान पर बढ़ी बहस
हाल के दिनों में सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर ‘आरक्षण हटाओ’ नाम से अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान से जुड़े लोग आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी राय और मांगें रख रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर कई राजनीतिक और सामाजिक संगठन इस अभियान का विरोध भी कर रहे हैं। रामदास अठावले का कहना है कि आरक्षण संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है और इसे लेकर भड़काऊ अभियान चलाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है राजनीतिक बहस
‘आरक्षण हटाओ’ अभियान को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और दल भी अपनी राय रख सकते हैं। फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक दल ने इस अभियान के समर्थन का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर बहस लगातार जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्रीय आईटी मंत्री से मुलाकात के बाद इस मामले में सरकार की ओर से कोई नया कदम उठाया जाता है या नहीं। यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।
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