इस्लामाबाद में हुई अहम वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के सख्त बयान ने हालात को और गंभीर बना दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास कोई भी जहाज संदिग्ध गतिविधि करता पाया गया, तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
ईरान का पलटवार, दिखाई सख्ती
ट्रंप की इस चेतावनी पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी तरह की ‘नाकेबंदी’ को स्वीकार नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरान के इस रुख से साफ है कि स्थिति धीरे-धीरे टकराव की ओर बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
पाकिस्तान की एंट्री, चीन से बातचीत
इसी बीच पाकिस्तान भी इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय नजर आ रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की सरकार हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। वहीं, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने चीन के विदेश मंत्री Wang Yi से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने इस्लामाबाद में हुई वार्ता और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर चर्चा की। माना जा रहा है कि चीन इस मुद्दे पर संतुलन बनाने की कोशिश कर सकता है।
दुनिया की नजरें अगले कदम पर
मौजूदा हालात में दुनिया की नजरें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं। जहां एक ओर ट्रंप का सख्त रुख टकराव को हवा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। हालांकि, बातचीत के फेल होने के बाद यह साफ हो गया है कि अब हालात पहले से ज्यादा संवेदनशील हो चुके हैं। यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद बड़े संघर्ष में बदल सकता है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ेगा।
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