पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही खींचतान चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय के हालिया बयान ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जुलाई में होने वाले संसद सत्र के दौरान स्थिति साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा, “अगला संसद सत्र जुलाई में है, तब पता चलेगा कि आगे क्या होगा।” मीडिया के लगातार सवालों पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, “आप लोग मुझे पागल कर रहे हैं।” हालांकि, उन्होंने किसी बड़े फैसले का खुलासा नहीं किया, लेकिन उनके बयान से साफ संकेत मिला कि पार्टी के अंदर कुछ अहम राजनीतिक घटनाक्रम चल रहे हैं।
नेता और उपनेता के चयन पर फोकस
शताब्दी रॉय ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि फिलहाल संसदीय दल के नेता और उपनेता को लेकर फैसला होना बाकी है। उनके मुताबिक, आने वाले दिनों में सबसे पहले इन पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। इसके बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसदीय दल के नेतृत्व को लेकर होने वाला फैसला TMC के भीतर चल रहे मतभेदों की दिशा तय कर सकता है। हाल के दिनों में पार्टी के कुछ नेताओं के अलग रुख अपनाने और संगठन के भीतर असहमति की खबरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
लोकसभा स्पीकर से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें
शताब्दी रॉय और अन्य बागी सांसदों की लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बागी सांसदों ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग रणनीति अपनाने के संकेत दिए हैं। शताब्दी रॉय ने दावा किया कि उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ जाने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर कोई दावा नहीं किया है। उनके मुताबिक, अब इस पूरे मामले में अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर होगा।
क्या TMC के लिए बढ़ेगी मुश्किल?
पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव से पहले TMC के भीतर बढ़ती नाराजगी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। विपक्ष पहले ही पार्टी में बढ़ रहे मतभेदों को बड़ा मुद्दा बना रहा है। ऐसे समय में शताब्दी रॉय जैसे वरिष्ठ नेता के बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर जुलाई में शुरू होने वाले संसद सत्र पर टिकी है, जहां बागी सांसदों के अगले कदम और पार्टी की रणनीति साफ हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC इस संकट से कैसे निकलती है और क्या पार्टी अपने नेताओं को एकजुट रखने में सफल हो पाती है।
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