सोशल मीडिया पर इन दिनों WWE सुपरस्टार और हॉलीवुड अभिनेता रोमन रेंस की कुछ तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में दावा किया जा रहा है कि वह दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए। एक तस्वीर में उनके हाथ में शहीद भगत सिंह की तस्वीर दिखाई दे रही है, जबकि दूसरी तस्वीर में उन्हें CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ खड़ा दिखाया गया है। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसे सच मान लिया और सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू कर दिया। हालांकि, जब इन तस्वीरों की पड़ताल की गई तो मामला कुछ और ही निकला।
तस्वीरों की जांच में नहीं मिला किसी दावे का सबूत
वायरल तस्वीरों को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी की जांच करने पर ऐसा कोई विश्वसनीय प्रमाण सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि रोमन रेंस हाल ही में भारत आए थे या जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे। रोमन रेंस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी ऐसी किसी यात्रा या कार्यक्रम का कोई उल्लेख नहीं मिला। वहीं, आंदोलन से जुड़े आधिकारिक प्लेटफॉर्म या आयोजकों की ओर से भी उनके शामिल होने की कोई पुष्टि नहीं की गई। ऐसे में वायरल तस्वीरों के साथ किया जा रहा दावा तथ्यों से मेल नहीं खाता।
AI तकनीक से तैयार की गईं बताई जा रहीं तस्वीरें
फैक्ट चेक के दौरान यह बात सामने आई कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही तस्वीरें संभवतः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की गई हैं। तस्वीरों में रोमन रेंस को ऐसे दृश्य में दिखाया गया है, जिसका वास्तविक घटनाओं से कोई प्रमाणित संबंध नहीं मिला। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि AI तकनीक की मदद से बेहद वास्तविक दिखने वाली तस्वीरें और वीडियो बनाए जा सकते हैं, जिससे गलत जानकारी तेजी से फैल सकती है। इसलिए किसी भी वायरल फोटो या वीडियो पर भरोसा करने से पहले उसके स्रोत और आधिकारिक पुष्टि की जांच करना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हर तस्वीर सच नहीं होती
छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फोटो, वीडियो और दावे वायरल हो रहे हैं। ऐसे माहौल में भ्रामक या AI से तैयार सामग्री भी तेजी से फैल सकती है। रोमन रेंस की वायरल तस्वीरों का मामला भी इसी का एक उदाहरण है। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह दावा सही नहीं पाया गया कि रोमन रेंस जंतर-मंतर पहुंचे थे या उन्होंने किसी छात्र नेता से मुलाकात की थी। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी सामग्री को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई की पुष्टि करना बेहद जरूरी है, ताकि गलत जानकारी फैलने से रोका जा सके।
