सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के समर्थक सोनम वांगचुक का आमरण अनशन लगातार चर्चा में बना हुआ है। गुरुवार को उनका अनशन 19वें दिन में प्रवेश कर गया। बताया जा रहा है कि लंबे समय से भोजन न लेने के कारण उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ा है। स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्टों के अनुसार उनका वजन काफी कम हुआ है और शरीर में कमजोरी बढ़ती जा रही है। इसी बीच देशभर के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और राजनीतिक नेताओं ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई है। कई लोगों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील भी की है। वांगचुक का कहना है कि उनकी लड़ाई शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए है।
राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सोनम वांगचुक के समर्थन में एक लंबा बयान जारी कर केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि किसी जनहित के मुद्दे पर उठी आवाज को दबाना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। राज ठाकरे के अनुसार, वांगचुक लगातार छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखे अपने संदेश में कहा कि किसी आंदोलन को कमजोर करना आसान हो सकता है, लेकिन उससे जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ठाकरे ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और समाधान का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए।
कभी सरकार की तारीफ करने वाले वांगचुक अब क्यों कर रहे हैं विरोध?
राज ठाकरे ने अपने बयान में यह भी याद दिलाया कि कुछ वर्ष पहले सोनम वांगचुक को विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित किया गया था और उनके काम की सराहना की गई थी। पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में उनके योगदान को देशभर में सम्मान मिला था। बाद में लद्दाख से जुड़े कई मुद्दों पर उन्होंने सरकार का समर्थन भी किया था। हालांकि समय के साथ उन्होंने कुछ नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाने शुरू किए। राज ठाकरे का कहना है कि जब किसी व्यक्ति के विचार सरकार के पक्ष में होते हैं तो उसकी सराहना की जाती है, लेकिन विरोध की स्थिति में उसकी बातों को महत्व नहीं दिया जाता। इसी संदर्भ में उन्होंने वांगचुक के मौजूदा आंदोलन को गंभीरता से लेने की मांग की।
क्या हैं सोनम वांगचुक की मांगें, जिन पर छिड़ी बहस?
सोनम वांगचुक फिलहाल शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और छात्रों का भरोसा बहाल किया जाना चाहिए। इसके अलावा वे पहले भी लद्दाख से जुड़े कई मुद्दों, स्थानीय अधिकारों और क्षेत्रीय विकास को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति छात्रों के भविष्य और पारदर्शिता की मांग कर रहा है तो उसकी बातों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से इस विषय पर अलग-अलग स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल देश की नजर इस बात पर टिकी है कि सोनम वांगचुक का आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है और उनकी मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है।
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