गौ-रक्षा और धार्मिक मुद्दों को लेकर प्रदेशभर में यात्रा कर रहे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गोंडा पहुंचे, जहां उन्होंने कई अहम विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और दान प्रबंधन के विवाद को लेकर भी सवाल उठाए। शंकराचार्य ने कहा कि इस मामले में जनता के सामने पूरी तस्वीर नहीं रखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों के इस्तीफे की चर्चा की जा रही है, उसकी आधिकारिक और सार्वजनिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। उनके अनुसार, जब किसी बड़े मामले में कार्रवाई होती है तो उससे जुड़ी प्रक्रिया भी पारदर्शी होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
चंपत राय के इस्तीफे को लेकर जताई शंका
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि इस्तीफे की बात कही जा रही है तो इसकी आधिकारिक पुष्टि और दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए। शंकराचार्य का कहना था कि केवल मौखिक दावों के आधार पर किसी भी विवाद का समाधान नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक होने से रोका जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने चंपत राय को जिम्मेदारी दी थी, वे आज भी उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं। शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए दावा किया कि चंपत राय को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बाबा बागेश्वर के बयान को बताया अहम संकेत
अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य ने बाबा बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हालिया बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाबा बागेश्वर ने बहुत सीमित शब्दों में एक बड़ी बात कह दी है। शंकराचार्य के अनुसार, जब कोई प्रभावशाली धार्मिक व्यक्ति भी किसी मुद्दे पर खुलकर बोलने से बचता हुआ दिखाई देता है, तो यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए और किसी भी विषय पर चर्चा डर या दबाव के बिना होनी चाहिए। उनके बयान से यह संकेत मिला कि वह धार्मिक संस्थाओं और उनसे जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। इस टिप्पणी के बाद बाबा बागेश्वर के पुराने बयान भी फिर चर्चा में आ गए हैं।
योगी सरकार और बीजेपी पर भी साधा निशाना
गोंडा में अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने प्रदेश में गौ-रक्षा और अवैध गतिविधियों को लेकर सरकार की कार्यशैली पर असंतोष जताया। साथ ही उन्होंने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के उस बयान का जवाब भी दिया, जिसमें शंकराचार्य पर भगवा वस्त्र पहनकर राजनीति करने का आरोप लगाया गया था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि संत समाज का काम समाज और धर्म से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखना है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी विवादित टिप्पणी की, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। उनके बयानों के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा, राम मंदिर ट्रस्ट और अन्य संबंधित पक्ष इस पूरे मामले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल शंकराचार्य के आरोपों ने एक बार फिर राम मंदिर से जुड़े मुद्दों को सुर्खियों में ला दिया है।
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