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नसरापुर दरिंदगी: दोषी को फांसी की सजा; डिप्टी CM शिंदे बोले- ‘यह फैसला अपराधियों के लिए मिसाल’

पुणे के नसरापुर में मासूम से दरिंदगी मामले में कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला। जानें कैसे मात्र दो महीने में दोषी भीमराव कांबले को मिली फांसी की सजा और इस पर क्यों भड़क उठे डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे।

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महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरापुर से एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एक मासूम और बेकसूर बच्ची के साथ हुई बेहद निर्मम दरिंदगी और फिर उसकी क्रूरता से की गई हत्या के मामले में आखिरकार अदालत ने अपना सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने इस जघन्य अपराध के मुख्य दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा (Suffer to death) सुनाई है। अदालत के इस सख्त रुख से पीड़ित परिवार को जहां एक तरफ न्याय मिला है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता का देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा और ज्यादा मजबूत हुआ है। इस फैसले के बाद से पूरे इलाके में न्याय की जीत की चर्चा है।

डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का बड़ा बयान: ‘यह मिसाल कायम करने वाला न्याय है’

इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने न्यायालय का दिल से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन, कोर्ट और सरकारी वकीलों ने जिस एकजुटता और तत्परता के साथ काम किया, वह वाकई काबिले तारीफ है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले को प्रभावी ढंग से चलाकर बेहद कम समय के भीतर दोषी को मौत की सजा देना न्याय व्यवस्था की एक बड़ी जीत है। शिंदे ने कड़े शब्दों में कहा, “मैंने पहले ही साफ कर दिया था कि समाज में ऐसी घिनौनी और क्रूर मानसिकता वाले अपराधियों को जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं है, इन्हें सिर्फ और सिर्फ फांसी ही होनी चाहिए।” उन्होंने इस केस की लगातार निगरानी के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गृह विभाग और पूरी जांच टीम की पीठ थपथपाई।

डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार की दोटूक- ‘मात्र दो महीने में इंसाफ, अब कांपेंगे अपराधी’

न्यायालय के इस अभूतपूर्व फैसले पर महाराष्ट्र की दूसरी डिप्टी सीएम सुनेत्रा अजीत पवार ने भी अपनी गहरी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक और नजीर पेश करने वाला मामला बताया। सुनेत्रा पवार ने कहा कि घटना के महज दो महीनों के भीतर पूरी सुनवाई को मुकम्मल करना और दोषी को उसके अंजाम तक पहुंचाना अपने आप में एक मिसाल है। ऐसी विकृत सोच वाले दरिंदों के लिए हमारे सभ्य समाज में कोई जगह नहीं हो सकती। इस फैसले ने समाज में कानून का खौफ पैदा किया है, जिससे भविष्य में कोई भी ऐसा जघन्य अपराध करने से पहले हजार बार सोचेगा। उन्होंने पुणे ग्रामीण पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) और सरकारी वकीलों की टीम की तत्परता की जमकर सराहना की।

सुरक्षा का अचूक भरोसा और सरकार का कड़ा संकल्प

इस फैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार ने प्रदेश की महिलाओं, बच्चियों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है। सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि माताओं-बहनों की सुरक्षा के लिए भविष्य में और भी ज्यादा कठोर और कड़े कदम उठाए जाएंगे। सरकार हर मोड़ पर पीड़ित परिवार के दुख में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। शासन का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और अत्यंत कठोर कार्रवाई ही अपराधियों के मन में कानून का असली डर पैदा कर सकती है। इस फैसले से न केवल महिलाओं की सुरक्षा के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है, बल्कि समाज और सरकार को मिलकर ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लगाने की एक नई दिशा भी मिली है।

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