दुनिया के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक, मध्य पूर्व से आ रही खबरों के बीच भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान सरकार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष निमंत्रण भेजा था। हालांकि, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और कूटनीतिक संतुलन को देखते हुए भारत ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए अपने एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को भेजने का फैसला किया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की तरफ से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्यमंत्री पबित्रा मार्गेरिटा इस शोक सभा में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारतीय नेताओं का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे मध्य पूर्व में भारी तनाव है, और भारत का वहां जाना यह दिखाता है कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच के कूटनीतिक संबंध आज भी कितने अहम हैं। इस भव्य विदाई समारोह में दुनिया भर के कई देशों के वीआईपी मेहमानों और बड़े नेताओं के जुटने की उम्मीद है।
6 दिनों तक थमी रहेगी ईरान की रफ्तार: इमाम रजा के पवित्र आशियाने में मिलेगी आखिरी जगह
ईरान के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा और भावुक कर देने वाला शोक कार्यक्रम होने जा रहा है, जो पूरे 6 दिनों तक चलेगा। अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई का यह सिलसिला 4 जुलाई 2026 से शुरू होकर 9 जुलाई तक जारी रहेगा। आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, शुरुआती दो दिन यानी 4 और 5 जुलाई को राजधानी तेहरान के प्रसिद्ध इमाम खुमैनी मोसाला प्रार्थना हॉल में भव्य श्रद्धांजलि सभा रखी गई है, जहां लाखों की संख्या में आम लोग अपने नेता को नमन करेंगे। इसके बाद 6 और 7 जुलाई को उनकी अंतिम यात्रा तेहरान की सड़कों से गुजरते हुए शिया समुदाय के मुख्य धार्मिक केंद्र, यानी कोम शहर पहुंचेगी। इस महा-शोकसभा का आखिरी पड़ाव 9 जुलाई को उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में होगा, जहाँ पूरी दुनिया से आए मेहमानों की मौजूदगी में दिवंगत नेता को शिया मुसलमानों के आठवें इमाम, इमाम रजा के बेहद पवित्र और ऐतिहासिक दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया जाएगा।
वो खौफनाक रात: अमेरिका-इजरायल का वो अचूक हमला, जिसने खत्म कर दिया 36 साल का राज
अयातुल्ला अली खामेनेई का अंत बेहद चौंकाने वाले अंदाज में हुआ, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को सन्न कर दिया था। पिछले 36 वर्षों से ईरान की सत्ता पर बेहद मजबूत पकड़ रखने वाले 86 वर्षीय खामेनेई की मौत बीते 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक बेहद गुप्त और विनाशकारी ज्वाइंट एयरस्ट्राइक में हो गई थी। इस ऐतिहासिक और बड़े ऑपरेशन की सफलता का एलान खुद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सामने किया था। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के आंतरिक सूत्रों ने बाद में एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि यह हमला इतना सटीक और भीषण था कि इसमें सिर्फ सुप्रीम लीडर ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के चार और करीबी सदस्य भी मारे गए थे। मरने वालों में खामेनेई की बेटी, दामाद और उनका एक नाती/पोता भी शामिल था। इस एक हमले ने ईरान के 46 साल पुराने शिया धर्मतांत्रिक शासन की बुनियाद को पूरी तरह हिला कर रख दिया।
सुलग उठा मध्य पूर्व: बेटे के हाथ में आई कमान, अब क्या होगा ईरान का अगला कदम?
खामेनेई की इस अचानक और हिंसक मौत ने पूरे मध्य पूर्व को एक ऐसे बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है, जहां कभी भी बड़ा विस्फोट हो सकता है। इस हमले के बाद ईरान की ओर से की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है। सत्ता के इस सबसे बड़े शून्य को भरने के लिए मार्च की शुरुआत में ही ईरान की शीर्ष परिषद ने एक आपातकालीन फैसला लिया, जिसके तहत खामेनेई के बेटे मोज्तबा खामेनेई को ईरान का नया ‘सर्वोच्च नेता’ चुन लिया गया। मोज्तबा के सामने अब न सिर्फ अपने पिता और परिवार की मौत का बदला लेने की बड़ी चुनौती है, बल्कि देश के भीतर सुलग रहे असंतोष और कमजोर होती अर्थव्यवस्था को संभालने का भी भारी दबाव है। अब पूरी दुनिया की नजरें जुलाई में होने वाले इस अंतिम संस्कार पर टिकी हैं, क्योंकि इसके बाद ही तय होगा कि नया ईरानी नेतृत्व मध्य पूर्व की इस जंग को थामने का प्रयास करेगा या फिर दुश्मनों के खिलाफ कोई और बड़ा कदम उठाएगा।
