देश में त्योहारों का सीजन नजदीक आते ही सियासी पारा चढ़ने लगा है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि देश में चीनी की कीमतों में भारी उछाल आया है। उन्होंने सरकार की तरफ से उठाए जा रहे कदमों और इथेनॉल नीति को लेकर कई तीखे सवाल उठाए। कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि आम जनता को बढ़ती महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी वजह सरकार की गलत नीतियां हैं।
बीजेपी का स्पष्टीकरण और आंकड़े
कांग्रेस के इन आरोपों का भारतीय जनता पार्टी की तरफ से वरिष्ठ नेता अमित मालवीय ने कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से आंकड़े साझा करते हुए कहा कि चीनी की कीमतों और इथेनॉल नीति को आपस में जोड़ना राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में उत्पादन में आई गिरावट और घटता क्लोजिंग स्टॉक मुख्य वजहें हैं। सरकार घरेलू उपलब्धता को बनाए रखने के लिए संतुलित तरीके से आयात नीति पर काम कर रही है।
एथेनॉल और आयात को लेकर सफाई
गन्ने के रस को एथेनॉल उत्पादन में झोंकने के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेता ने स्पष्ट किया कि इसका चीनी की कमी से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में पहले भी भारी मात्रा में चीनी का आयात किया जाता रहा है, जब इथेनॉल सम्मिश्रण (E20) का कोई प्रावधान नहीं था। इसके अलावा, आयातित कच्ची चीनी का एक बड़ा हिस्सा प्रोसेसिंग और री-एक्सपोर्ट के कार्यों में भी इस्तेमाल होता है, इसलिए इसे घरेलू संकट से जोड़ना पूरी तरह से गलत है।
निष्कर्ष और आगे की राह
चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और त्योहारों के समय बढ़ती महंगाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस जहां इसे सरकारी नीतियों की नाकामी बता रही है, वहीं बीजेपी इसे पूरी तरह से उत्पादन के आंकड़ों और बाजार के नेचुरल ट्रेंड से जोड़ रही है। आने वाले दिनों में खाद्य और कृषि नीतियों को लेकर यह बहस देश की राजनीति में और तेज हो सकती है।
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