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बजट 2026 का सबसे बड़ा टैक्स ट्विस्ट? पति-पत्नी को लेकर हो सकता है ऐतिहासिक फैसला

Budget 2026 में पति-पत्नी के लिए जॉइंट टैक्सेशन पॉलिसी लागू हो सकती है। सिंगल इनकम फैमिली को टैक्स में बड़ी राहत, ओल्ड टैक्स रिजीम खत्म होने और स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की भी संभावना।

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आम बजट 2026 को लेकर मिडिल क्लास की उम्मीदें एक बार फिर इनकम टैक्स पर टिकी हैं। पिछले बजट में सरकार ने 12 से 15 लाख रुपये तक की सालाना आय को टैक्स से राहत देकर बड़ा कदम उठाया था, इसलिए इस बार टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। लेकिन इसी बीच टैक्स सिस्टम में एक ऐतिहासिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार पति-पत्नी के लिए जॉइंट टैक्सेशन पॉलिसी को बजट का हिस्सा बना सकती हैं। अगर यह प्रस्ताव आता है, तो शादीशुदा जोड़ों को पहली बार अपनी आय को जोड़कर एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का विकल्प मिल सकता है। यह व्यवस्था फिलहाल अमेरिका, ब्रिटेन और कई यूरोपीय देशों में पहले से लागू है। भारत में इसे लागू करना टैक्स सिस्टम के लिहाज से एक बड़ा और साहसिक फैसला माना जा रहा है।

सिंगल इनकम फैमिली को क्यों होगा सबसे ज्यादा फायदा?

भारत में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जहां पति या पत्नी में से केवल एक व्यक्ति कमाता है और दूसरा घर-परिवार की जिम्मेदारी संभालता है। मौजूदा टैक्स सिस्टम में ऐसे परिवारों को दूसरे जीवनसाथी की टैक्स छूट का कोई सीधा फायदा नहीं मिलता, क्योंकि इनकम टैक्स व्यक्तिगत आधार पर लगता है। नतीजा यह होता है कि एक ही कमाई पर पूरा टैक्स बोझ आ जाता है। जॉइंट टैक्सेशन लागू होने पर पति-पत्नी की कुल आय को जोड़कर टैक्स कैलकुलेट किया जाएगा और दोनों की बेसिक छूट सीमा (Exemption Limit) का संयुक्त लाभ मिल सकेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर पति 15 लाख रुपये सालाना कमाता है और पत्नी गृहिणी है, तो जॉइंट टैक्सेशन के तहत दोनों की छूट सीमा जुड़ने से टैक्स देनदारी में बड़ी गिरावट आ सकती है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे मामलों में टैक्स बोझ 30 से 50 फीसदी तक कम हो सकता है, जिससे परिवार के हाथ में ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम आएगी।

होम लोन, इंश्योरेंस और निवेश में कैसे बढ़ेगा फायदा?

जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न का एक और बड़ा फायदा यह होगा कि पति-पत्नी टैक्स छूट और डिडक्शन को आपस में बेहतर तरीके से एडजस्ट कर सकेंगे। अभी होम लोन के ब्याज, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, एनपीएस या अन्य निवेशों पर मिलने वाली छूट को अलग-अलग दिखाना पड़ता है। लेकिन जॉइंट टैक्सेशन में परिवार अपनी जरूरत के हिसाब से तय कर सकेगा कि किस डिडक्शन का फायदा कैसे लिया जाए। इससे टैक्स प्लानिंग ज्यादा आसान और प्रभावी हो जाएगी। साथ ही यह भी चर्चा है कि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर सकती है, जिससे नौकरीपेशा लोगों को अतिरिक्त राहत मिलेगी। यह पूरा मॉडल सरकार की उस सोच से मेल खाता है, जिसमें मिडिल क्लास की बचत बढ़ाकर खपत और आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की कोशिश की जा रही है।

ओल्ड टैक्स रिजीम का अंत और न्यू सिस्टम की मजबूती

बजट 2026 में एक और अहम ऐलान की संभावना जताई जा रही है। ओल्ड टैक्स रिजीम को धीरे-धीरे खत्म करने की योजना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 72 फीसदी टैक्सपेयर्स पहले ही न्यू टैक्स रिजीम को अपना चुके हैं। ऐसे में सरकार अगले 5 वर्षों में पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने का रोडमैप पेश कर सकती है। जॉइंट टैक्सेशन का प्रस्ताव इसी नई व्यवस्था को और आकर्षक बनाने का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि सरकार इसे अनिवार्य नहीं बल्कि विकल्प के तौर पर ला सकती है, ताकि जो लोग चाहें वे अलग-अलग ITR फाइल करते रहें। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह न सिर्फ टैक्स सिस्टम को सरल बनाएगा बल्कि शादीशुदा जोड़ों और सिंगल इनकम परिवारों को वास्तविक और लंबी अवधि की राहत भी देगा। अब सबकी नजरें बजट भाषण पर टिकी हैं कि क्या यह बड़ा टैक्स रिफॉर्म हकीकत बनेगा या फिलहाल सिर्फ चर्चा तक ही सीमित रहेगा।

 

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