उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रहने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अरीशा एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनके सोशल मीडिया वीडियो नहीं, बल्कि उनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर है। संभल के रहने वाले शाहरुख नाम के युवक ने आरोप लगाया है कि करीब तीन साल पहले उसकी मुलाकात नैनीताल घूमने के दौरान अरीशा से हुई थी। दोनों एक ही जिले के रहने वाले थे, इसलिए बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ गई। युवक का कहना है कि समय के साथ दोनों की कई बार मुलाकात हुई। इसी दौरान अरीशा ने उसके कुछ निजी फोटो और वीडियो अपने पास रख लिए। शुरुआत में उसे इस पर कोई शक नहीं हुआ, लेकिन बाद में उसे पूरे मामले पर संदेह होने लगा।
ब्लैकमेल कर पैसे मांगने का आरोप
शाहरुख का आरोप है कि जब उसे अरीशा की गतिविधियों पर शक हुआ और उसने दूरी बनानी शुरू की, तभी उसके पास धमकी भरे संदेश और कॉल आने लगे। शिकायत के मुताबिक अरीशा के साथ महमूद खान, अनस और शुएब नाम के लोग भी इस मामले में शामिल थे। युवक का दावा है कि इन लोगों ने निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे पैसों की मांग की। आरोप है कि डर के कारण उसने अलग-अलग समय पर कुल 55 हजार रुपये दे दिए। इसके बावजूद कथित रूप से ब्लैकमेलिंग बंद नहीं हुई और लगातार दबाव बनाया जाता रहा। युवक का कहना है कि मानसिक रूप से परेशान होने के बाद उसने कानूनी मदद लेने का फैसला किया।
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, जांच शुरू
पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अरीशा और अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच के दौरान मोबाइल रिकॉर्ड, चैट, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा सकती है। फिलहाल पुलिस ने किसी भी आरोपी को दोषी या निर्दोष नहीं माना है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और सबूत सामने आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस मामले में अरीशा की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है। अरीशा के इंस्टाग्राम पर एक लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं, जिसके कारण यह मामला तेजी से लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, किसी भी आरोप को अंतिम सच नहीं माना जा सकता। कानून के अनुसार जांच पूरी होने और अदालत में तथ्यों के आधार पर ही किसी की जिम्मेदारी तय होती है। ऐसे मामलों में पुलिस जांच सबसे अहम होती है, क्योंकि वही यह स्पष्ट करती है कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और उनके समर्थन में क्या सबूत मौजूद हैं। फिलहाल सभी की नजर पुलिस की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
