बिहार में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब और ज्यादा चर्चा में आ गया है। राज्य सरकार के मंत्री अशोक चौधरी पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे और करीब एक घंटे तक परिवार के सदस्यों से बातचीत की। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अभी तक साफ नहीं हो पाया है। उन्होंने खास तौर पर जगदीशपुर के एसडीएम की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस की मुठभेड़ जैसी कार्रवाई के दौरान किसी एसडीएम की भूमिका क्या थी, इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि मामले की सच्चाई सामने आए और किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।
1400 करोड़ रुपये के आरोप ने बढ़ाई हलचल
मुलाकात के दौरान भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जवनिया कटाव से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए करीब 1400 करोड़ रुपये की योजना बनी थी, लेकिन इस राशि में गड़बड़ी हुई। उन्होंने एसडीएम पर धन के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। इस पर मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि उन्हें अभी इस रकम और पूरे मामले की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है तो इसकी भी जांच कराई जाएगी। उन्होंने साफ किया कि सरकार हर उस आरोप की जांच करवाएगी, जिसके समर्थन में तथ्य सामने आएंगे। हालांकि फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रिटायर्ड जज से जांच कराने का बताया कारण
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जांच करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष तरीके से सच्चाई तक पहुंचना है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार केवल औपचारिक कार्रवाई करना चाहती तो जांच किसी पुलिस अधिकारी से भी कराई जा सकती थी, लेकिन इस मामले में रिटायर्ड जज से जांच कराने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि लोगों का भरोसा बना रहे और निष्पक्ष रिपोर्ट सामने आए। उन्होंने पूर्व पुलिस महानिदेशक अभयानंद के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने एसडीएम की भूमिका पर सवाल उठाए थे। मंत्री ने कहा कि जब इतने वरिष्ठ अधिकारी भी सवाल उठा रहे हैं तो उन बिंदुओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।
हथियार और एनकाउंटर पर भी उठे सवाल
मंत्री ने भरत भूषण तिवारी के पास मिले कथित हथियार को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर हथियार असली था तो फायरिंग क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जांच में यह भी साफ होना चाहिए कि बरामद हथियार असली था या नहीं और एनकाउंटर की पूरी परिस्थितियां क्या थीं। वहीं, मंत्री के इन बयानों के बाद भी जिला प्रशासन या संबंधित एसडीएम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब लोगों की नजर जांच पर टिकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि एनकाउंटर के दौरान क्या हुआ, एसडीएम की भूमिका क्या थी और परिवार द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों में कितनी सच्चाई है।
