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40 दिन बाद रुकी ईरान-अमेरिका की जंग, ट्रंप ने किया सीजफायर का ऐलान, क्या अब भी बंद रहेगा होर्मुज स्ट्रेट?

ईरान और अमेरिका के बीच 40 दिन की जंग के बाद सीजफायर का ऐलान, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण। जानें होर्मुज स्ट्रेट, ट्रंप के बयान और इस्लामाबाद बैठक से जुड़े सभी बड़े अपडेट।

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अमेरिका और ईरान के बीच करीब 40 दिनों तक चले तनाव और संघर्ष के बाद आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सीजफायर का ऐलान कर दिया है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत की सांस ली जा रही है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। ट्रंप ने साफ कहा कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित और तुरंत खोलने पर सहमत होता है, तो अमेरिका अगले दो हफ्तों तक किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोक देगा। वहीं ईरान ने भी संकेत दिया है कि अगर उस पर हमले बंद होते हैं, तो उसकी सेना अपने ऑपरेशन रोक सकती है। हालांकि दोनों देशों के बयानों में जीत का दावा अलग-अलग तरीके से किया जा रहा है, जिससे इस समझौते की वास्तविक स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है।

होर्मुज स्ट्रेट बना समझौते की कुंजी

इस पूरे सीजफायर का सबसे अहम बिंदु होर्मुज स्ट्रेट है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। ईरान ने कहा है कि तकनीकी और सैन्य सीमाओं को ध्यान में रखते हुए दो सप्ताह तक इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। वहीं व्हाइट हाउस का दावा है कि अमेरिका ने दबाव बनाकर ईरान को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया। इसके अलावा खबरें हैं कि ईरान भविष्य में इस स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने की योजना बना रहा है, जिससे युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए फंड जुटाया जा सके। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में और स्पष्टता आने की उम्मीद है, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार और तेल बाजार को सीधे प्रभावित करता है।

शांति की कोशिशों के बीच जारी हमले और क्षेत्रीय तनाव

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हो चुका है, लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। इजरायल की ओर से हमले जारी रहने की खबरें सामने आई हैं, जबकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इजरायल भी बमबारी रोकने पर सहमत हो गया है। इस विरोधाभास ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में यह सीजफायर केवल एक अस्थायी राहत हो सकता है, न कि स्थायी समाधान।

पाकिस्तान में अहम बैठक, क्या निकलेगा स्थायी हल?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच Shehbaz Sharif ने एक अहम पहल करते हुए अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों को इस्लामाबाद में बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। 10 अप्रैल को प्रस्तावित इस बैठक में दोनों देशों के बीच आगे की रणनीति और स्थायी शांति पर चर्चा हो सकती है। पाकिस्तान का मानना है कि इस वार्ता में न केवल अमेरिका और ईरान, बल्कि इजरायल और लेबनान के बीच चल रहे संघर्ष को भी खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बैठक पर टिकी है, क्योंकि यहीं से यह तय होगा कि यह सीजफायर अस्थायी विराम है या स्थायी शांति की शुरुआत।

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