उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया, लेकिन यह सत्र शुरुआत से ही राजनीतिक टकराव का मंच बन गया। कार्यवाही की शुरुआत निंदा प्रस्ताव से हुई, जिसे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में पेश किया। इसके बाद जब उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस अधिनियम के समर्थन में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी, पर तीखे आरोप लगाए। अपने संबोधन में उन्होंने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं को राजनीति में बराबरी का अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, उनके बयान के दौरान कई बार विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताई, जिससे सदन का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा।
विपक्ष पर किया तीखा हमला
ब्रजेश पाठक ने अपने भाषण के दौरान समाजवादी पार्टी के पिछले कार्यकाल की कई घटनाओं का उल्लेख किया, जिससे सदन में हंगामा और बढ़ गया। खासतौर पर उन्होंने मायावती से जुड़े चर्चित गेस्ट हाउस कांड का जिक्र किया, जिस पर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। इस मुद्दे पर कुछ देर के लिए स्थिति इतनी गरमा गई कि सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और कार्यवाही प्रभावित हुई। डिप्टी सीएम ने आरोप लगाया कि जो दल आज महिला हितों की बात कर रहे हैं, उनका रिकॉर्ड इस मामले में साफ नहीं रहा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
हाथ जोड़कर की अपील
सदन में सबसे चौंकाने वाला पल तब आया जब ब्रजेश पाठक ने अपने भाषण के अंत में विपक्ष के सामने हाथ जोड़ लिए। उन्होंने यह कदम किसी दबाव में नहीं, बल्कि एक राजनीतिक अपील के रूप में उठाया। उन्होंने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध न करें और संसद में इसे पारित कराने में सहयोग दें। उनका कहना था कि यह मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर देश की महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा है, इसलिए सभी दलों को एकजुट होकर इसका समर्थन करना चाहिए। उनका यह भावुक और विनम्र अंदाज सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया।
भाजपा-समाजवादी पार्टी आमने-सामने
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। भाजपा जहां विपक्ष को महिला विरोधी बताने में जुटी है, वहीं समाजवादी पार्टी ने पलटवार करते हुए भाजपा पर ही महिलाओं के मुद्दों पर असंवेदनशील होने का आरोप लगाया है। सपा ने यह भी मांग उठाई कि विधानसभा और अन्य संस्थाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। सदन के अंदर और बाहर दोनों ही जगह इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विषय और ज्यादा गरमाएगा और इसका असर आगामी चुनावी रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।
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