यूपी में खेल और खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसा ऐलान किया है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की खेल संस्कृति को पूरी तरह बदल सकता है। सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकार की योजना यूपी के हर गांव, हर ब्लॉक, हर जिले और हर मंडल मुख्यालय तक खेल सुविधाएं पहुंचाने की है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, जिले में बड़ा स्टेडियम और मंडल मुख्यालय पर स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस दिशा में तेजी से तैयारी कर रही है और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को अक्सर संसाधनों और प्लेटफॉर्म की कमी का सामना करना पड़ता रहा है। योगी सरकार का यह कदम गांव से लेकर शहर तक छिपी खेल प्रतिभाओं को सामने लाने का आधार बन सकता है।
गोरखपुर से मेरठ तक, खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यह ऐलान गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित विधायक खेल स्पर्धा–2025 के पुरस्कार वितरण समारोह में कर रहे थे। वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि सरकार प्रदेश के कई हिस्सों में पहले से ही खेल सुविधाओं को अपग्रेड कर रही है। गोरखपुर में बेलीपार के पास एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनने जा रहा है, जबकि गोरखपुर के रीजनल स्टेडियम का 63 करोड़ रुपये की लागत से नवोद्धार किया जा रहा है। इसके साथ ही वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में भी आधुनिक सुविधाओं से लैस एक बेहतरीन स्टेडियम तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि मेरठ में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर स्थापित स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और उसका विश्वस्तरीय निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है। अब अगला लक्ष्य हर मंडल मुख्यालय पर स्पोर्ट्स कॉलेज खोलने का है, जिससे खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिल सके।
संस्थाओं से एक-एक खेल गोद लेने की अपील
योगी आदित्यनाथ ने खेलों को जन आंदोलन बनाने के लिए समाज और संस्थाओं की भागीदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही गोरखपुर महानगर की सभी प्रमुख संस्थाओं के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में संस्थाओं से अपील की जाएगी कि वे एक-एक खेल को गोद लें। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस मॉडल में कुछ सहयोग सरकार की ओर से होगा और कुछ जिम्मेदारी संस्थाओं की होगी। इन खेल केंद्रों पर अच्छे और प्रशिक्षित कोच रखे जाएंगे, ताकि बच्चों को शुरू से ही सही मार्गदर्शन मिल सके। सीएम योगी ने कहा कि इससे खेल सिर्फ प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों के जीवन का हिस्सा बनेंगे। यह पहल खास तौर पर उन बच्चों के लिए फायदेमंद होगी, जिनमें प्रतिभा तो है, लेकिन संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाते।
खेल प्रतियोगिताओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने विधायक खेल स्पर्धा को लेकर भविष्य की योजनाओं का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा कि अगली बार खेल प्रतियोगिताएं सिर्फ बच्चों और छात्रों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि वार्ड स्तर पर कामकाजी और रिटायर्ड लोगों के लिए भी आयोजित की जाएंगी। योजना के मुताबिक, पहले वार्ड स्तर पर प्रतियोगिताएं होंगी, फिर कई वार्डों को मिलाकर उपनगरीय स्तर और उसके बाद नगर स्तर पर बड़े आयोजन किए जाएंगे। इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बड़े समारोह में सम्मानित किया जाएगा। बच्चों और छात्रों की प्रतियोगिताएं बालक और बालिका वर्ग में तीन स्तरों—बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा—पर आयोजित होंगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि खेलों की तरह सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। गायन, वादन, नृत्य, नाट्य जैसी कलाओं की प्रतियोगिताएं जनवरी के पहले सप्ताह में होंगी और 11 से 13 जनवरी को गोरखपुर महोत्सव के मुख्य आयोजन में विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। योगी सरकार की यह सोच साफ संकेत देती है कि प्रदेश में खेल और संस्कृति दोनों को समान रूप से आगे बढ़ाने की बड़ी तैयारी की जा रही है।
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