रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में अब सबकी नजर 3 अगस्त पर टिक गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष को दो सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने स्पष्ट किया है कि 3 अगस्त को यह तय होगा कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगे आरोप साबित होते हैं या उन्हें राहत मिलती है। यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है और अब अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है।
महिला पहलवानों के आरोप और अब तक की कानूनी कार्रवाई
यह मामला छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। शिकायतों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की थी और 15 जून 2023 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A, 354D और 506(1) के तहत आरोप लगाए गए। पुलिस का कहना था कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय किए गए। इसके बाद मई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और गवाहों के आधार पर पांच महिला पहलवानों से जुड़े मामलों में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप तय किए। अदालत ने माना था कि प्रथम दृष्टया ऐसे पर्याप्त आधार मौजूद हैं, जिनके चलते मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़नी चाहिए।
अदालत में क्या हुई बहस, किस पक्ष ने क्या रखा अपना पक्ष?
सुनवाई के दौरान महिला पहलवानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के सामने आरोपों और जांच से जुड़े तथ्यों को रखा। वहीं, बृजभूषण शरण सिंह की ओर से बचाव पक्ष ने सभी आरोपों का विरोध करते हुए अदालत से राहत देने की मांग की। दिल्ली सरकार की ओर से सरकारी वकील ने भी अपना पक्ष रखा। इसके अलावा, इस मामले में WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर भी सह-आरोपी हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक शिकायतकर्ता को कथित रूप से धमकाया था। अदालत ने उनके खिलाफ भी आपराधिक धमकी से संबंधित आरोप तय किए हैं। अब दोनों पक्षों की लिखित दलीलों के बाद अदालत अंतिम फैसला सुनाएगी, जिस पर खेल जगत और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
नाबालिग पहलवान का मामला क्यों हुआ बंद, अब आगे क्या होगा?
इस पूरे विवाद के दौरान एक नाबालिग पहलवान ने भी बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उस मामले में POCSO कानून के तहत दायर केस को बंद करने के लिए अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट पेश की, जिसे स्वीकार कर लिया गया और वह मामला समाप्त हो गया। फिलहाल अदालत के सामने केवल वयस्क महिला पहलवानों से जुड़े आरोपों पर फैसला होना बाकी है। 3 अगस्त को आने वाला निर्णय इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेगा। यदि अदालत आरोपों को साबित मानती है तो कानूनी प्रक्रिया अगले चरण में जाएगी, जबकि आरोप सिद्ध न होने की स्थिति में बृजभूषण शरण सिंह को राहत मिल सकती है। इसलिए यह फैसला न केवल इस मामले से जुड़े पक्षों बल्कि पूरे देश की निगाहों में अहम माना जा रहा है।
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