उत्तर प्रदेश में सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने हजारों अभ्यर्थियों को चौंका दिया है। 16 और 17 अप्रैल को प्रदेश के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर कराई गई यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को राज्य सरकार ने पूरी तरह से रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस निर्णय की जानकारी देते हुए साफ किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। परीक्षा के आयोजन के कुछ ही दिनों बाद जिस तरह से लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं, उससे यह संकेत मिलने लगे थे कि मामला गंभीर है। अभ्यर्थियों के बीच पहले से ही सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर चर्चाएं चल रही थीं कि कुछ केंद्रों पर परीक्षा सामान्य तरीके से नहीं हुई। सरकार के इस कदम के बाद प्रदेश की राजनीति से लेकर शिक्षा जगत तक में चर्चा तेज हो गई है।
क्यों रद्द हुई परीक्षा?
इस पूरे मामले की जांच जब राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंपी गई, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच एजेंसी को ऐसे संकेत मिले कि परीक्षा से जुड़े कुछ लोगों ने अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें अनुचित लाभ दिलाने की कोशिश की। कहीं प्रश्नपत्र से पहले जानकारी देने की बात सामने आई, तो कहीं सेटिंग के जरिए चयन पक्का कराने के दावे किए गए। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध लेन-देन और नेटवर्क की जानकारी भी सामने आई, जिसने सरकार की चिंता बढ़ा दी। जब यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री तक पहुंची, तो उन्होंने बिना किसी देरी के पूरी भर्ती परीक्षा को रद्द करने का निर्देश दे दिया। सरकार का साफ कहना है कि अगर एक भी योग्य उम्मीदवार के साथ अन्याय हुआ है, तो पूरी प्रक्रिया को दोबारा सही तरीके से करना जरूरी है, चाहे इसके लिए सख्त फैसला ही क्यों न लेना पड़े।
सरकार का रुख और अभ्यर्थियों को क्या भरोसा
परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे क्या होगा और अभ्यर्थियों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का मकसद ईमानदार और मेहनती उम्मीदवारों के हितों की रक्षा करना है। राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को दोबारा आयोजित किया जाए। नई परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और कड़ी निगरानी में कराई जाएगी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न बचे। आयोग को यह भी कहा गया है कि परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और पूरी प्रक्रिया में तकनीकी साधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जाए। कई छात्रों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है और कहा है कि अगर परीक्षा में धांधली हुई है, तो उसे रद्द करना ही सही फैसला है, ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनका हक मिल सके।
नई परीक्षा, तारीखें और अब तक का पूरा गणित
यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के लिए इस बार करीब 1.14 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। परीक्षा के तुरंत बाद कुछ केंद्रों से अनियमितताओं की शिकायतें मिलने लगी थीं, जिसके बाद जांच शुरू की गई। अब परीक्षा रद्द होने के बाद सभी की नजरें नई तारीखों पर टिकी हैं। सरकार और आयोग दोनों ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही नई परीक्षा तिथियों की घोषणा की जाएगी, लेकिन उससे पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी की जाएंगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। इस फैसले से भले ही कुछ समय के लिए उम्मीदवारों को मानसिक तनाव और इंतजार झेलना पड़े, लेकिन सरकार का दावा है कि लंबी अवधि में यही कदम सबसे सही साबित होगा। अब यह मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रणाली में भरोसा बनाए रखने का बन गया है।
