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बुलडोजर आने से पहले ही टूटने लगी मस्जिद! संभल में ऐसा क्या हुआ कि लोगों ने खुद उठा लिए हथौड़े?

संभल में सरकारी जमीन पर बनी अवैध मस्जिद को लेकर प्रशासन की कार्रवाई से पहले बड़ा मोड़ आया। 4 जनवरी को बुलडोजर चलना था, लेकिन उससे पहले ही लोग खुद ढांचा गिराने लगे।

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उत्तर प्रदेश के संभल जिले की सदर तहसील स्थित गांव सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर में उस वक्त माहौल पूरी तरह बदल गया, जब प्रशासन की तय कार्रवाई से पहले ही लोग खुद अवैध मस्जिद को गिराते नजर आए। दरअसल, प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने इस अवैध ढांचे को हटाने के लिए 4 जनवरी की तारीख तय की थी और इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन बुलडोजर पहुंचने से पहले ही मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग हथौड़े और औजार लेकर मस्जिद के ढांचे को तोड़ते दिखाई दिए। इस दृश्य ने पूरे इलाके में चर्चा को जन्म दे दिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, प्रशासन की सख्ती और कानूनी आदेश के बाद किसी तरह का टकराव न हो, इसी सोच के तहत समुदाय के लोगों ने खुद ही अवैध कब्जा हटाने का फैसला लिया। देखते ही देखते यह मामला जिले भर में चर्चा का विषय बन गया और मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हालात शांत बने रहे।

2018 से चल रहा था कानूनी विवाद

इस पूरे मामले की जड़ें कई साल पुरानी हैं। तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, मस्जिद के मुतवल्ली हाजी शमीम पर 439 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर मस्जिद निर्माण कराने का आरोप था। इस संबंध में पहली रिपोर्ट 14 जून 2018 को दर्ज की गई थी। इसके बाद यह मामला तहसीलदार न्यायालय में पहुंचा, जहां वर्षों तक सुनवाई चली। इस दौरान दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों की बारीकी से जांच की गई। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने स्पष्ट रूप से फैसला सुनाया कि जिस भूमि पर मस्जिद बनी है, वह सरकारी है और उस पर किया गया निर्माण अवैध है। अदालत ने मुतवल्ली को भूमि से बेदखल करने और अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए। इसी आदेश के अनुपालन में प्रशासन ने आगे की कार्रवाई की योजना बनाई थी।

4 जनवरी के लिए तय था बुलडोजर एक्शन

अदालत के आदेश के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया था। 4 जनवरी 2026 को अवैध निर्माण हटाने के लिए बुलडोजर चलाया जाना था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी सुरक्षा बल की तैनाती की गई थी। प्रशासन ने पांच थानों की पुलिस, PAC और RRF की एक-एक कंपनी, 12 लेखपाल, दो कानूनगो और तीन बुलडोजर मौके पर तैनात करने की योजना बनाई थी। तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने साफ कहा था कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन की इस सख्ती का असर साफ दिखाई दिया। कार्रवाई से पहले ही अतिक्रमणकारियों के हौसले कमजोर पड़ गए और हालात यहां तक पहुंच गए कि समुदाय के लोगों ने खुद ही अवैध ढांचे को गिराने का काम शुरू कर दिया।

प्रशासन बोला– खुद कब्जा हटा रहे हैं, तो अच्छा है

जब लोगों द्वारा खुद मस्जिद गिराने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए, तो प्रशासन की प्रतिक्रिया भी सामने आई। तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि 4 जनवरी को बुलडोजर से अवैध निर्माण ध्वस्त किया जाना था, लेकिन अगर लोग खुद ही कब्जा हटा रहे हैं तो यह सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मकसद केवल सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना है, न कि किसी तरह का विवाद खड़ा करना। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से किसी भी तरह की तनावपूर्ण स्थिति से बचा जा सका। वहीं, स्थानीय स्तर पर यह घटना एक मिसाल के तौर पर देखी जा रही है कि प्रशासनिक सख्ती और कानूनी प्रक्रिया के बाद लोग खुद आगे आकर अवैध कब्जा हटाने को मजबूर हुए। अब प्रशासन पूरे मामले की निगरानी कर रहा है ताकि भविष्य में दोबारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण न हो।

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