उत्तर प्रदेश के इटावा में सियासी पारा अचानक उस वक्त चढ़ गया, जब सदर विधानसभा से भाजपा विधायक सरिता भदौरिया के आवास के बाहर का एक विवादित घटनाक्रम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। इस मामले ने देखते ही देखते एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है, जिसमें एक तरफ समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता विधायक पर अभद्रता करने और बदसलूकी का आरोप लगा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर विधायक ने पूरे मामले को छवि खराब करने की साजिश करार दिया है। विधायक के घर के बाहर शुरू हुआ यह विवाद अब पुलिस थाने तक पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में भारी गहमागहमी का माहौल बना हुआ है।
क्या है वायरल वीडियो और सपा कार्यकर्ताओं का दावा?
मामले की शुरुआत तब हुई जब सपा कार्यकर्ता रेशू चौधरी अपने सहयोगियों के साथ विधायक सरिता भदौरिया के आवास पर पहुंचे थे। सपा नेता का आरोप है कि वे अपने गांव में विकास कार्य कराने और भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित कराने की मांग को लेकर ज्ञापन देने गए थे। रेशू का दावा है कि जब उन्होंने विकास कार्यों का मुद्दा उठाया, तो विधायक भड़क गईं और उन्होंने सपा नेताओं के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि जब इस पूरी घटना का वीडियो इंटरनेट पर सामने आया, उसके बाद सत्ता के दबाव में उनके खिलाफ झूठी कार्रवाई अमल में लाई गई और देर रात पुलिस उनके घर पहुंची।
रंगदारी और मारपीट के आरोप में दर्ज हुई FIR
दूसरी तरफ, विवाद केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है। करनपुरा निवासी अंकित नामक युवक ने पुलिस को तहरीर देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। तहरीर के अनुसार, सनसिटी गेट के पास रेशू चौधरी और उनके साथियों ने उसे रोक लिया और उसके साथ गाली-गलौज व मारपीट की। आरोप है कि विरोध करने पर उससे हर महीने 20 हजार रुपये की रंगदारी की मांग की गई और मना करने पर अभद्रता की गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कर रहे हैं।
‘दबाव में नहीं दूंगी स्वीकृति’— विधायक की दो टूक सफाई
इस पूरे घटनाक्रम पर विधायक सरिता भदौरिया ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा कि जब वह अपने आवास से बाहर निकल रही थीं, तब वहां पहले से ही कुछ लोग एक व्यक्ति को घेरकर हंगामा कर रहे थे। विधायक का आरोप है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर उनकी गाड़ी के पास आकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया और उन पर सपा के लेटर पैड पर जबरन स्वीकृति देने का दबाव बनाने लगे। विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इटावा में सपा के सांसद और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद हैं, इसलिए सपा के लेटर पैड पर किसी मांग को वे दबाव में आकर मंजूर नहीं करेंगी। फिलहाल, दोनों पक्षों के दावों के बीच पुलिस पूरे मामले की पड़ताल में जुटी हुई है।
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