उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 को लेकर जो उम्मीदें मई-जून में चुनाव कराने की थीं, अब वे लगभग खत्म होती दिख रही हैं। Uttar Pradesh State Election Commission की तैयारियों में लगातार देरी के कारण पूरा चुनावी कार्यक्रम पीछे खिसकता जा रहा है। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव के लिए जरूरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। खासतौर पर मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में देरी ने पूरे चुनावी कैलेंडर को प्रभावित कर दिया है। प्रशासनिक स्तर पर यह माना जा रहा है कि अब चुनाव तय समय सीमा के भीतर कराना संभव नहीं रह गया है।
वोटर लिस्ट पर लगातार देरी
उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 की प्रक्रिया में सबसे अहम कड़ी मानी जाने वाली मतदाता सूची एक बार फिर टल गई है। पहले इसे 22 अप्रैल 2026 को जारी किया जाना था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10 जून कर दिया गया है। यह पांचवीं बार है जब वोटर लिस्ट के प्रकाशन की तारीख आगे बढ़ाई गई है। आयोग के अनुसार, 21 अप्रैल से 28 मई तक मतदाता सूची का कंप्यूटरीकरण और डुप्लीकेट नाम हटाने का काम किया जाएगा। इसके बाद 29 मई से 9 जून तक मतदान केंद्रों की मैपिंग, वार्डों की नंबरिंग और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इन सभी चरणों के बाद ही अंतिम सूची जारी हो पाएगी।
आरक्षण और कानूनी अड़चनें बनी बड़ी वजह
उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 में देरी की एक बड़ी वजह आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया भी है। ओबीसी आरक्षण को लेकर कई स्तर पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है और मामला Allahabad High Court में लंबित है। जब तक अदालत से अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक आरक्षण की स्थिति तय नहीं हो पाएगी। इसके अलावा, बड़ी संख्या में मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियां भी आई हैं, जिनके निस्तारण में समय लग रहा है। इन सभी कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों ने चुनाव की राह को और जटिल बना दिया है।
बढ़े वोटर, बढ़ी चुनौती—प्रशासन पर दबाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने जब दिसंबर में मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू किया था, तब करीब 12.69 करोड़ मतदाता सूची में शामिल थे। यह संख्या पिछले पंचायत चुनाव के मुकाबले लगभग 40 लाख ज्यादा थी। इतने बड़े स्तर पर नए मतदाताओं को जोड़ने और पुराने डेटा को अपडेट करने की प्रक्रिया आसान नहीं रही। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने के लिए आवेदन किया, जिससे काम और लंबा खिंच गया। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि सभी प्रक्रियाओं को सही तरीके से पूरा कर पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किया जाए। फिलहाल उम्मीदवारों और मतदाताओं को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
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