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स्कूल में आखिर छुट्टी के बाद क्या हुआ? 8 साल की बच्ची घंटों तक कमरे में बंद रही, सामने आई चौंकाने वाली लापरवाही

कासगंज के एक प्राथमिक स्कूल में 8 साल की बच्ची छुट्टी के बाद करीब 5 घंटे तक क्लासरूम में बंद रही। परिवार की शिकायत के बाद बच्ची को सुरक्षित निकाला गया। पढ़ें पूरी खबर।

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Kasganj News: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सहावर विकासखंड के ग्राम खितौली स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 3 में पढ़ने वाली 8 वर्षीय छात्रा छुट्टी के बाद भी स्कूल के कमरे में ही बंद रह गई। हैरानी की बात यह रही कि स्कूल बंद करते समय किसी शिक्षक या कर्मचारी ने यह जांच नहीं की कि सभी बच्चे सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं या नहीं। छुट्टी होने के बाद स्कूल का कमरा बंद कर दिया गया और मासूम बच्ची अंदर ही रह गई। कई घंटे तक वह कमरे में अकेली बैठी रही और मदद के लिए रोती रही, लेकिन उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था।

घर नहीं पहुंची बच्ची तो परिवार की बढ़ी चिंता

जब काफी समय बीत जाने के बाद भी बच्ची घर नहीं पहुंची तो परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई। परिजनों ने पहले आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। धीरे-धीरे परिवार की बेचैनी बढ़ती गई और उन्हें किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी। इसके बाद उन्होंने गांव के प्रधान को पूरी जानकारी दी। ग्राम प्रधान ने भी मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत स्कूल प्रशासन से संपर्क किया। बच्ची की तलाश शुरू की गई तो पता चला कि वह स्कूल के ही एक बंद कमरे के अंदर मौजूद है। यह जानकारी मिलते ही परिवार और गांव के लोग स्कूल पहुंच गए।

डरी-सहमी हालत में मिली छात्रा

स्कूल का कमरा खोला गया तो बच्ची अंदर डरी हुई और रोती हुई मिली। कई घंटों तक अकेले बंद रहने के कारण वह काफी घबराई हुई थी। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते बच्ची का पता नहीं चलता तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था। घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि छुट्टी के समय हर कक्षा की जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई बच्चा अंदर न रह जाए। खासकर छोटे बच्चों के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे बड़े सवाल

इस घटना ने स्कूलों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल बंद करने से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों को सभी कमरों की जांच करनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा किसी भी शैक्षणिक संस्थान की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। राहत की बात यह रही कि बच्ची सुरक्षित मिल गई और उसके साथ कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ। हालांकि इस घटना ने अभिभावकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। अब लोग मांग कर रहे हैं कि मामले की जांच हो और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। यह घटना सभी स्कूलों के लिए भी एक सीख है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी छोटी सी चूक भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

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