UP: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में ईमानदारी की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया। यहां रोडवेज बस के चालक और परिचालक ने बस में छूटे लाखों रुपये से भरे बैग को सुरक्षित उसके मालिक तक पहुंचाकर अपनी सच्चाई और जिम्मेदारी का परिचय दिया। इस घटना की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है और लोग दोनों कर्मचारियों की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
दरअसल, आजमगढ़ डिपो की एक बस में यात्रा कर रहे कुछ यात्रियों का बैग गलती से बस में ही छूट गया था। उस बैग में करीब पांच लाख रुपये नकद रखे हुए थे। जब चालक और परिचालक को यह बैग मिला तो उन्होंने इसे सुरक्षित रख लिया और सही समय पर उसके असली मालिक को वापस कर दिया।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आज भी समाज में ईमानदार लोग मौजूद हैं जो अपने कर्तव्य और नैतिक मूल्यों को सबसे ऊपर रखते हैं। रोडवेज अधिकारियों ने भी इस सराहनीय काम के लिए दोनों कर्मचारियों को सम्मानित किया है।
कैसे बस में छूट गया लाखों रुपये का बैग
मिली जानकारी के अनुसार आजमगढ़ डिपो की बस संख्या आजमगढ़-सुल्तानपुर-लखनऊ मार्ग पर चलती है। दो मार्च को इस बस को चालक संदीप पांडेय और परिचालक रमेश चंद्र यादव लेकर आजमगढ़ से लखनऊ के लिए रवाना हुए थे। यह बस रोजाना की तरह अपने निर्धारित मार्ग पर यात्रियों को लेकर आगे बढ़ रही थी।
रास्ते में जगदीशपुर इलाके से चार यात्री इस बस में सवार हुए। उन्होंने लखनऊ जाने के लिए टिकट लिया और यात्रा शुरू की। यात्रा के दौरान सब कुछ सामान्य रहा और बस रात करीब आठ बजे लखनऊ के आलमबाग बस स्टेशन पहुंची।
यहां पहुंचकर चारों यात्री बस से उतर गए, लेकिन जल्दबाजी में उनका एक बैग बस में ही छूट गया। यात्रियों को इस बात का ध्यान नहीं रहा कि उनका बैग सीट के पास ही रह गया है। बस आगे बढ़ने की तैयारी में थी तभी चालक और परिचालक की नजर उस बैग पर पड़ी।
बैग में थे पांच लाख रुपये, फिर भी नहीं डगमगाई नीयत
जब बस कर्मचारियों को बैग मिला तो उन्होंने उसे खोलकर देखा। बैग के अंदर बड़ी मात्रा में नकद पैसे रखे हुए थे। बताया जाता है कि बैग में करीब पांच लाख रुपये थे। इतनी बड़ी रकम देखकर कोई भी व्यक्ति लालच में आ सकता है, लेकिन चालक और परिचालक ने पूरी ईमानदारी दिखाते हुए उस बैग को सुरक्षित रख लिया।
उन्होंने तय किया कि जब तक बैग के असली मालिक नहीं मिल जाते, तब तक इसे संभालकर रखा जाएगा। कुछ समय बाद वे यात्री भी अपने बैग की तलाश में बस स्टेशन पहुंच गए। जब उन्होंने बस कर्मचारियों से अपने बैग के बारे में पूछा तो चालक और परिचालक ने तुरंत उन्हें उनका बैग सौंप दिया।
बैग वापस मिलने पर यात्रियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने राहत की सांस ली और दोनों कर्मचारियों का धन्यवाद किया। यात्रियों ने कहा कि अगर बैग नहीं मिलता तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता था।
ईमानदारी के लिए दोनों कर्मचारियों को किया गया सम्मानित
इस सराहनीय कार्य की जानकारी जब परिवहन विभाग के अधिकारियों तक पहुंची तो उन्होंने भी दोनों कर्मचारियों की प्रशंसा की। क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय में शुक्रवार को एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें चालक संदीप पांडेय और परिचालक रमेश चंद्र यादव को बुलाकर सम्मानित किया गया।
क्षेत्रीय प्रबंधक अजय सिंह ने बताया कि दोनों कर्मचारियों ने अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से परिवहन निगम का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्य अन्य कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।
रोडवेज के प्रबंध निदेशक प्रभु एन. सिंह के निर्देश पर दोनों कर्मचारियों को उपहार देकर सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक सेवा से जुड़े कर्मचारियों के लिए यह एक अच्छा उदाहरण है कि ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करने से समाज में सम्मान मिलता है।
यह घटना बताती है कि आज भी समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं जो सही और गलत के बीच फर्क समझते हैं और अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाते हैं। चालक और परिचालक की इस ईमानदारी की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है और लोग उन्हें सच्चाई की मिसाल बता रहे हैं।
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