संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम 6 मार्च 2026 को जारी कर दिया है। इस परिणाम में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की रहने वाली वैभवी अग्रवाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 35 हासिल की है। वैभवी की सफलता की कहानी सिर्फ उनकी मेहनत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष और आत्मविश्वास की भी मिसाल है।
वैभवी अग्रवाल की कहानी इसलिए भी खास बन जाती है क्योंकि उन्होंने शुरुआती असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी। लगातार प्रयास करते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया। उनकी सफलता से न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में खुशी का माहौल है।
यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद वैभवी अब देश की शीर्ष प्रशासनिक सेवाओं में शामिल होने की ओर बढ़ रही हैं। उनकी रैंक को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें आईएएस कैडर मिल सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय कैडर आवंटन के बाद ही तय होगा।
तीसरे प्रयास में मिली बड़ी सफलता
वैभवी अग्रवाल ने अपनी सफलता के पीछे लगातार मेहनत और आत्मविश्वास को सबसे बड़ा कारण बताया है। उन्होंने बताया कि यूपीएससी परीक्षा में उन्हें तीसरे प्रयास में सफलता मिली। पहले दो प्रयासों में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी तैयारी जारी रखी।
उन्होंने कहा कि शुरुआती असफलताओं ने उन्हें निराश जरूर किया, लेकिन उन्होंने उसे अपनी कमजोरी बनने नहीं दिया। इसके बजाय उन्होंने अपनी गलतियों को समझा और तैयारी की रणनीति को बेहतर बनाया। उन्होंने पढ़ाई के तरीके में बदलाव किया और जिन विषयों में कमी थी, उन्हें सुधारने पर खास ध्यान दिया।
लगातार मेहनत और बेहतर रणनीति का ही परिणाम रहा कि तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार रैंक हासिल कर ली। वैभवी का मानना है कि किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए धैर्य और निरंतर प्रयास बेहद जरूरी होते हैं।
इंटरव्यू में साड़ी पर पूछे गए सवाल से प्रभावित हुआ पैनल
वैभवी अग्रवाल ने यूपीएससी इंटरव्यू के दौरान का एक दिलचस्प अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह दिल्ली में इंटरव्यू देने पहुंचीं तो उन्होंने छत्तीसगढ़ी ट्राइबल आर्ट डिजाइन वाली साड़ी पहनी हुई थी।
इंटरव्यू पैनल के एक सदस्य ने उनसे उनकी साड़ी पर बने आर्ट के बारे में सवाल पूछा। पैनल ने जानना चाहा कि साड़ी पर बना यह डिजाइन किस परंपरा से जुड़ा हुआ है और इसका क्या महत्व है।
इस सवाल का जवाब देते हुए वैभवी ने बताया कि साड़ी पर बना यह डिजाइन छत्तीसगढ़ की मुड़िया जनजाति की पारंपरिक कला को दर्शाता है। उन्होंने इस आर्ट के सांस्कृतिक महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
उनका यह जवाब सुनकर इंटरव्यू पैनल काफी प्रभावित हुआ। माना जा रहा है कि उनकी समझ और आत्मविश्वास ने इंटरव्यू में अच्छा प्रभाव छोड़ा, जिसका फायदा उन्हें अंतिम परिणाम में भी मिला।
बचपन में मां को खोने के बावजूद नहीं छोड़ा सपना
वैभवी अग्रवाल की सफलता के पीछे एक भावनात्मक संघर्ष की कहानी भी जुड़ी हुई है। जब वह केवल चार साल की थीं, तब उनकी मां प्रतिभा अग्रवाल का निधन हो गया था। इतनी छोटी उम्र में मां को खो देना किसी भी बच्चे के लिए बेहद कठिन होता है।
उनके पिता शीतल अग्रवाल ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर वैभवी ने पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया और अपने सपनों को साकार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ती रहीं।
वैभवी का कहना है कि जीवन में असफलताएं और मुश्किलें जरूर आती हैं, लेकिन अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत जारी रखी जाए तो सफलता जरूर मिलती है। उनका सपना है कि वह भविष्य में प्रशासनिक सेवा के माध्यम से खासतौर पर महिलाओं के हित में काम करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।
रूपल जायसवाल का इंटरव्यू जवाब भी चर्चा में
यूपीएससी 2025 के इंटरव्यू में एक और सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है। मध्य प्रदेश के खंडवा की रहने वाली रूपल जायसवाल ने इस परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 43 हासिल की है।
इंटरव्यू के दौरान उनसे एक दिलचस्प सवाल पूछा गया कि अगर किसी व्यक्ति के पास 20 करोड़ रुपये की संपत्ति हो और पत्नी बिना किसी ठोस कारण के तलाक ले, तो उसे कितना मेंटेनेंस मिलना चाहिए।
रूपल ने इस सवाल का संतुलित और तार्किक जवाब दिया, जिसकी काफी चर्चा हो रही है। यूपीएससी इंटरव्यू में इस तरह के सवाल उम्मीदवार की समझ, सोच और निर्णय क्षमता को परखने के लिए पूछे जाते हैं।
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