कन्नौज में रविवार को एक राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद देखने को मिला। केंद्रीय राज्य मंत्री असीम अरुण अपने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे, लेकिन DM और SDM की देरी की वजह से उन्हें लगभग 45 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। नाराज़ मंत्री ने कार्यक्रम को बीच में ही छोड़ दिया। इस घटना में उपस्थित भाजपाई कार्यकर्ताओं को भड़का दिया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि प्रशासन ने प्रोटोकॉल और सम्मान की अनदेखी की है, जो किसी भी मंत्री के लिए अस्वीकार्य है।
नाराज़गी से भड़की राजनीतिक हलचल
कन्नौज में मंत्री के बीच में कार्यक्रम छोड़ने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी कार्यक्रम में अधिकारियों और मंत्रियों के बीच तालमेल नहीं होगा, तो जनता में भी विश्वास कमजोर होगा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह घटना राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी दोनों पर सवाल खड़ा करती है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना की काफी चर्चा रही, और कई लोगों ने प्रशासन के रवैये की आलोचना की।
DM और SDM ने देरी का कारण बताया
कन्नौज में स्थानीय प्रशासन ने बताया कि देरी का कारण अनिवार्य तैयारियों और सुरक्षा जांच थी। DM और SDM ने कहा कि मंत्री के लिए सभी इंतजाम किए गए थे, लेकिन कुछ सुरक्षा कारणों से विलंब हुआ। हालांकि इस सफाई से भाजपा कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में सन्नाटा नहीं टूटा। घटना ने यह सवाल भी उठाया कि क्या प्रोटोकॉल और प्रशासनिक जिम्मेदारी का पालन हर कार्यक्रम में प्रभावी ढंग से हो रहा है।
कार्यक्रम में हुई देरी का राजनीतिक असर
कन्नौज में इस घटना के राजनीतिक असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कन्नौज में भाजपा की छवि और केंद्रीय राज्य मंत्री की प्रतिष्ठा पर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच तालमेल की कमी को उजागर करती हैं। भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों में सुरक्षा और प्रोटोकॉल का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है ताकि विवाद और नाराज़गी जैसी स्थिति न बने।
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