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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का बाघ अचानक लापता! फिर सामने आया गड्ढे में दबा शव, जहर की कहानी ने सबको दहलाया

मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के पास रेडियो कॉलर लगे बाघ को जहर देकर हत्या कर गड्ढे में दबा दिया गया। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। वन्यजीव सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।

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मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के पास एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। छिंदवाड़ा क्षेत्र के राजस्व इलाके में शुक्रवार को रेडियो कॉलर लगे बाघ का शव एक गड्ढे में दबा पाया गया। वन विभाग और पुलिस ने बताया कि बाघ को पहले जहर दिया गया और फिर सबूत छिपाने के लिए उसे गड्ढे में दबा दिया गया। इस घटना ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासनिक लापरवाही की ओर ध्यान आकर्षित किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें स्थानीय लोग और अवैध अफीम की खेती में संलिप्त व्यक्ति शामिल हैं।

रेडियो कॉलर और बाघ की निगरानी

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र निदेशक राखी नंदा ने बताया कि यह बाघ दिसंबर 2004 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाया गया था। बाद में उसने रिजर्व क्षेत्र से बाहर अपना इलाका बना लिया था। वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उसके गले में रेडियो कॉलर लगाया गया था, जिससे उसकी लोकेशन ट्रैक की जा सकती थी। वन्यजीव कार्यकर्ताओं का आरोप है कि तीन मार्च से बाघ के कॉलर की कोई गतिविधि नहीं दिखाई दे रही थी, लेकिन वन विभाग ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे बाघ की जान बचाई जा सकती थी।

जहर से हुई हत्या का तरीका

जांच में पता चला कि आरोपियों ने बाघ के शिकार में जहर मिला दिया था। जब बाघ ने उस शिकार को खाया, तो उसकी मौत हो गई। आरोपियों का दावा है कि वे बाघ द्वारा मवेशियों को मारने से परेशान थे और इसी वजह से उन्होंने यह खौफनाक कदम उठाया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार पांचों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। वन्यजीव सुरक्षा कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए आरोप लगाया कि यह सिर्फ शिकार का मामला नहीं है, बल्कि निगरानी व्यवस्था की बड़ी विफलता भी है।

मध्य प्रदेश में बाघों की सुरक्षा पर सवाल

वन्यजीव कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस साल जनवरी से अब तक मध्य प्रदेश में 14 बाघों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा प्रदेश में बाघों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है और संरक्षण के दावों पर सवाल उठाता है। मामले की जांच पुलिस और वन विभाग दोनों कर रहे हैं। साथ ही यह देखा जा रहा है कि आरोपी तस्करी या अन्य संगठित अपराध गतिविधियों से जुड़े थे या नहीं। इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि बाघ जैसे संरक्षित वन्यजीव भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और प्रशासनिक सतर्कता बेहद जरूरी है।

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