उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के मुरसान क्षेत्र के गांव गारव गढ़ी में एक बेहद गंभीर और विवादित मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया है। जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी एक दंपत्ति—बलराम और उनकी पत्नी—पर उनके ही परिवार और कुछ ग्रामीणों ने कथित रूप से यह शक जताया कि बलराम ने ईसाई धर्म अपना लिया है और वह घर में उसी से जुड़ी परंपराओं का पालन कर रहे हैं। इसी संदेह को लेकर परिवार में पहले से तनाव चल रहा था, जो बाद में एक पंचायत तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि पंचायत में बातचीत के दौरान मामला शांत होने के बजाय और ज्यादा बिगड़ गया और स्थिति हिंसक रूप लेने लगी।
दंपत्ति को जूतों की माला पहनाकर किया गया सार्वजनिक अपमान
स्थानीय आरोपों के अनुसार, पंचायत के दौरान हालात इस कदर बिगड़ गए कि बलराम को कथित तौर पर जबरन जूतों की माला पहनाई गई और उसके साथ मारपीट भी की गई। जब उनकी पत्नी ने इस घटना का विरोध किया और अपने पति का बचाव करने की कोशिश की, तो उसे भी नहीं बख्शा गया। आरोप है कि महिला को भी अपमानित करते हुए जूतों की माला पहनाई गई और दोनों को भीड़ के सामने शर्मसार किया गया। इसके बाद पंचायत में कथित रूप से यह भी घोषणा की गई कि पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इस घटना ने ग्रामीणों के बीच डर और तनाव का माहौल पैदा कर दिया।
वीडियो फैलते ही मामला पहुंचा प्रशासन तक
हाथरस घटना का वीडियो किसी ग्रामीण द्वारा रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया गया, जो कुछ ही समय में तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में भीड़ के बीच दंपत्ति के साथ हो रहे व्यवहार को देखा जा सकता है, जबकि आसपास मौजूद लोग भी मौन दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मामला पुलिस और प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि पंचायत के दौरान कानून व्यवस्था का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ।
प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की
हाथरस घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और लोगों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे पारिवारिक विवाद बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह मामला सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रशासन ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने या सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का अधिकार नहीं है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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