कानपुर के नवाबगंज थाना क्षेत्र स्थित एनआरआई सिटी में एक 13 वर्षीय छात्र प्रखर त्रिवेदी ने नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। प्रखर आठवीं कक्षा का छात्र था और हाल ही में ट्यूशन टीचर ने उसके होमवर्क पूरा न करने की शिकायत उसकी दादी से की थी। इस शिकायत के बाद छात्र परेशान हो गया और दुखी होकर यह दर्दनाक कदम उठा लिया। घटना ने परिवार और पड़ोसियों को झकझोर दिया है।
पुलिस ने बताया कि परिवार के सदस्य और पड़ोसी घटना के बाद सदमे में हैं। छात्र की मां वास्को त्रिवेदी का कहना है कि प्रखर के पिता और सास के रवैये के कारण भी बेटा मानसिक रूप से परेशान था। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
पेशा वकील, परिवार में तनाव
प्रखर त्रिवेदी का परिवार समाज में सम्मानित माना जाता था। उसके पिता सुधांशु त्रिवेदी पेशे से वकील हैं और दादा राज किशोर त्रिवेदी भी सीनियर वकील रह चुके हैं। बाहर से सब सामान्य दिखता था, लेकिन अंदरुनी मामलों में परिवार लंबे समय से तनाव में था। प्रखर की मां लगभग चार साल से अपने पति से अलग रह रही हैं और तलाक का मामला अदालत में विचाराधीन है। प्रखर मां के साथ नहीं रह सका और पिता व दादी के साथ एनआरआई सिटी में ही रहा। परिवार में चल रहे विवाद और अलगाव ने बच्चे की मानसिक स्थिति को और अधिक नाजुक बना दिया। पड़ोसियों का कहना है कि प्रखर सामान्य छात्र था, लेकिन हाल ही में वह अंदर ही अंदर तनाव में था।
ट्यूशन की शिकायत और छात्र का दर्द
प्रखर की ट्यूशन टीचर ने उसके होमवर्क पूरा न करने की शिकायत दादी से की थी। बच्चे को यह शिकायत बर्दाश्त नहीं हुई। उसके मानसिक तनाव और घर में चल रहे विवाद ने उसे इस दुखद निर्णय पर मजबूर कर दिया।
मां वास्को त्रिवेदी ने आरोप लगाया है कि पति और सास की भूमिका भी बेटे की मौत में शामिल है। उनका कहना है कि परिवार के अंदरूनी तनाव और बच्चों के साथ व्यवहार ने प्रखर को इस कदम के लिए प्रेरित किया। पड़ोसियों और स्कूल के कर्मचारियों ने बताया कि प्रखर एक समझदार और होशियार छात्र था, लेकिन छोटे-छोटे तनाव भी उसके लिए भारी पड़ रहे थे।
पुलिस जांच और भविष्य की चिंता
नवाबगंज पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर लिया है। पुलिस अधिकारी बता रहे हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। पुलिस ने परिवार और पड़ोसियों से बयान भी लिए हैं। छोटे बच्चों में मानसिक दबाव और पारिवारिक तनाव बहुत गंभीर परिणाम दे सकते हैं। इस घटना ने समाज में एक बार फिर बच्चों की मानसिक स्थिति और स्कूल व ट्यूशन में दबाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है।
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