Siddharthnagar News: सिद्धार्थनगर के रमवापुर विशुनपुर गांव में तेज आंधी के दौरान एक निर्माणाधीन पानी की टंकी के टूटकर लटक जाने से हड़कंप मच गया है। यह टंकी जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही थी और अभी पूरी तरह से शुरू भी नहीं हुई थी कि प्राकृतिक आपदा ने इसकी मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोग निर्माण की गुणवत्ता को लेकर आशंका जता रहे हैं।
तेज आंधी ने उजागर की निर्माण की हकीकत
सोमवार को आए तेज अंधड़ और बारिश के बीच रमवापुर विशुनपुर में बनी 150 केएल क्षमता की पानी की टंकी अचानक टूटकर एक तरफ झुक गई और लटकने लगी। यह टंकी जल जीवन मिशन के तहत करीब 32.41 लाख रुपये की लागत से तैयार की जा रही थी, जिसका निर्माण कार्य मेघा इंजीनियरिंग फर्म द्वारा किया जा रहा है। टंकी का कुछ हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका था, लेकिन तेज हवाओं ने उसकी संरचना को कमजोर कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह से टंकी का ढांचा हवा में टूटकर लटक गया, उससे साफ लगता है कि निर्माण में या तो मानकों की अनदेखी की गई है या फिर सामग्री की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर यह टंकी पूरी तरह गिर जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
ग्रामीणों में दहशत, सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद गांव में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह टंकी किसी रिहायशी इलाके या किसी व्यक्ति के ऊपर गिरती, तो जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है। लोगों ने यह भी याद दिलाया कि हाल ही में सिद्धार्थनगर में ही एक अन्य पानी टंकी हादसे में एक युवक की मौत हो गई थी और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। उस घटना के बाद भी सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन इस नई घटना ने एक बार फिर व्यवस्था की पोल खोल दी है।
निर्माणाधीन ढांचे पर सवाल
इस मामले पर जल निगम के अवर अभियंता कमलेश कुमार ने सफाई देते हुए बताया कि टंकी अभी निर्माणाधीन थी और तेज आंधी के कारण यह घटना हुई है। उन्होंने कहा कि टंकी जिंक एल्मोनियम सामग्री से बनी थी और कुछ हिस्से खुले हुए थे, जिसके कारण हवा का दबाव सीधे ढांचे पर पड़ा और वह क्षतिग्रस्त हो गई। अधिकारी के अनुसार, मौसम सामान्य होने के बाद टंकी की मरम्मत कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर उसे पूरी तरह बदल भी दिया जाएगा। हालांकि, उनके इस बयान से ग्रामीणों की चिंता कम नहीं हुई है, बल्कि सवाल और गहरे हो गए हैं कि क्या वाकई निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार हो रहा था।
जांच की मांग तेज
इस घटना के बाद क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर निर्माण इसी तरह लापरवाही से होता रहा तो भविष्य में और बड़े हादसे हो सकते हैं।गांव के लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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