प्रयागराज में संगम स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अब पूरी तरह आक्रामक मूड में नजर आ रहे हैं। काशी पहुंचते ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने नई और बड़ी मांग रख दी है। शंकराचार्य ने साफ कहा कि अब प्रशासन की माफी का मुद्दा पीछे छूट चुका है और अब बात सीधे अधिकार और सम्मान की है। उन्होंने ऐलान किया कि 10 और 11 मार्च को संत समाज के साथ लखनऊ जाकर सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराएंगे। सबसे अहम मांग यह है कि सरकार 40 दिनों के भीतर गौ माता को “राज्य माता” घोषित करे। शंकराचार्य ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर तय समय में मांग पूरी नहीं हुई, तो बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
पालकी रोकने से भड़का मामला
पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान से जुड़ा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ पालकी पर बैठकर संगम स्नान के लिए जाना चाहते थे, लेकिन माघ मेला प्रशासन ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए पालकी के साथ आगे बढ़ने से रोक दिया। इसी दौरान समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्कामुक्की भी हुई, जिसे शंकराचार्य ने संत समाज का अपमान बताया। इसके विरोध में उन्होंने प्रयागराज में 11 दिनों तक अनशन किया। बाद में वे बिना संगम स्नान किए भारी मन से वाराणसी लौट आए। शंकराचार्य का कहना है कि उन्हें किसी सम्मान, फूलों की वर्षा या विशेष प्रोटोकॉल की चाह नहीं है, लेकिन संतों, बटुकों और संन्यासियों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर प्रशासन को खुले तौर पर माफी मांगनी चाहिए थी, जो अब तक नहीं हुई।
सरकार पर तीखा हमला
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने केवल संगम स्नान विवाद तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने यूजीसी के नए नियमों का भी खुलकर विरोध किया और इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताया। साथ ही उन्होंने गोहत्या के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। शंकराचार्य ने कहा कि गोसेवा और गोरक्षा हिंदुत्व की पहली सीढ़ी है, लेकिन लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद गोहत्या पूरी तरह से नहीं रुक पाई है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जिस तरह उनसे 24 घंटे में शंकराचार्य बनने का प्रमाण मांगा गया था और उन्होंने समय पर वह प्रमाण दे दिया, उसी तरह अब सरकार से “हिंदू होने का प्रमाण” मांगा जा रहा है। उनके अनुसार, यह प्रमाण तभी माना जाएगा जब गोहत्या पूरी तरह बंद हो और गौ माता को राज्य माता का दर्जा मिले।
लखनऊ कूच की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक संगम स्नान विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासन ने शंकराचार्य के सामने एक प्रस्ताव भी रखा था। इसमें कहा गया था कि भविष्य में जब भी वे स्नान के लिए आएंगे, उन्हें पूरे सम्मान के साथ पालकी सहित ले जाया जाएगा और अधिकारी स्वागत के लिए मौजूद रहेंगे। हालांकि शंकराचार्य ने इस प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया कि इसमें गलती स्वीकार करने और क्षमा मांगने का कोई स्पष्ट शब्द नहीं था। अब उन्होंने साफ कर दिया है कि 40 दिनों की समय-सीमा पूरी होने के बाद आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। लखनऊ में संत समाज के साथ प्रदर्शन की तैयारी शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि अगर सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन केवल धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बड़ा असर डाल सकता है।
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